सोमवार, 27 अप्रैल 2020

वीर्य की कमी or Lack of semen


वीर्य की कमी 

परिचय :
शारीरिक और मानसिक असंतुलित की स्थिति में शरीर के अन्दर वीर्य नहीं बन पाता या ठहर नहीं पाता और इस कारण शरीर तेजहीन, उदास और निष्काम हो जाता है। ऐसी स्थिति में वीर्य बन भी जाता है तो पतला या बिना शुक्र के ही बन पाता है जिसे हम वीर्य की कमी कहते हैं।

कारण :
वीर्य की कमी के कई कारण होते है। जैसे हस्तमैथुन, अधिक सहवास, खान-पान में सही देखभाल न करना, स्वप्नदोष, कमजोरी, मानसिक कमजोरी, चिन्ता करना आदि।

लक्षण :

हमेशा उदास सा रहना, किसी काम में मन का न लगना, सुस्ती, कमजोरी, अपंगता और मानसिक कमजोरी आदि के लक्षण वीर्य की कमी में देखे गये हैं।

परहेज :

गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।

चिकित्सा :

1. चोब चीनी : चोब चीनी को दूध में उबालकर 3 से 6 ग्राम को मस्तगी, इलायची और दालचीनी के साथ सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है।

2. छोटी माई : छोटी माई का चूर्ण 2 से 4 ग्राम सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) की कमी व कमजोरी दूर होती है।

3. गुरुच : गुरुच का चूर्ण आधे से एक ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ खाने से लाभ होता है।

4. बेल : बेल की जड़ की छाल को जीरे के साथ पीसकर घी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से वीर्य का पतलापन दूर होता है।

4. गुंजा : गुंजा की जड़ 2 ग्राम को दूध में पकाकर रोज रात को खाना खाने से पहले खाने से वीर्य के सभी रोग खत्म हो जाते हैं।

5. गुलशकरी : गुलशकरी की जड़ 6 ग्राम से 10 ग्राम को मिश्री मिले दूध के साथ दिन में सुबह और शाम खाने से वीर्य की कमी दूर होती है।

6. शतावरी : शतावरी का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम चीनी और दूध के साथ पेय बना कर सुबह-शाम सेवन करने से धातु (वीर्य) का पतलापन मिट जाता है।

7. सिरस :

सिरस के बीजों का चूर्ण 1 से 2 ग्राम मिश्री मिले गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से लाभ मिलता है।
सिरस की छाल और फूल बराबर मात्रा में पीसकर 30 दिनों तक रोज 1 चम्मच सुबह-शाम गर्म दूध के साथ फंकी लेने से वीर्य गाढ़ा होकर मर्दाना ताकत बढे़गी तथा शुक्राणुओं की वृद्धि होती है।
सिरस के बीजों का 2 ग्राम चूर्ण, दोगुनी चीनी मिलाकर रोज गरम दूध के साथ सुबह-शाम लेने से वीर्य बहुत गाढ़ा हो जाता है।

8. मखाना : मखाना की खीर बराबर रूप से खाने से वीर्य की कमी दूर होती है।

9. मुनक्का : मुनक्का खाने से धातु में वृद्धि होती है।

10. छुहारा : छुहारा बराबर रूप से दूध में उबालकर खाने से वीर्य बढ़ता है

11. कलम्बो ( करनी ) : कलम्बो (करनी) का साग रोज खाने से शुक्र की कमी दूर होती है और जल्द लाभ नजर आता है

12. काहू : काहू के बीज का चूर्ण 1 से 3 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है

13. प्याज : प्याज और अदरख का रस बराबर भाग में लेकर रोज सुबह-शाम शहद के साथ खाने से खोयी हुई जवानी लौट आती है।

14. हत्था जोरी : हत्था जोरी के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) के मिश्रण 40 ग्राम से 80 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से वीर्य की कमी और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।

15. उड़द : उड़द की दाल को पीसकर नमक, कालीमिर्च, जीरा, हींग, लहसुन अदरक आदि को डालकर घी में तलकर दही में मिलाकर खाने से वीर्य बढ़ता है।

16. शिलाजीत : थोड़ी मात्रा में गाय के दूध में घोल कर रोज सुबह-शाम 2-3 महीने तक खाने से धातु (वीर्य) की कमजोरी और अन्य बीमारी दूर हो जाती है।

17. दालचीनी :

दालचीनी के तेल में 3 गुना जैतून का तेल मिलाकर शिश्न पर लगाने से मर्दानगी लौट आती है। ध्यान रहे इस पर ठंड़ा पानी न पड़े।
दालचीनी का चूर्ण कर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद रोज 2 बार दूध के साथ लेने से लाभ होता है।

18. आंवला : रोजाना एक बड़े आंवले के मुरब्बे को खाने से मर्दाना ताकत आती है।

19. खजूर : खजूर रोज गर्म दूध के साथ खाने से कुछ ही दिनों में वीर्य बढ़ जाता है।

20. केसर : केसर को दूध में कुछ दिनों तक डालकर खाने से शीघ्रपतन दूर हो जाता है।

21. अनार : अनार के छिलके का रस शहद के साथ रोज सुबह-शाम लेने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।

22. सिंघाड़ा : सिघाडे़ के आटे मे बबूल का गोंद, देशी घी और मिश्री मिलाकर लगभग 30 ग्राम मात्रा में गर्म दूध के साथ लेने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है।

23. बादाम : कालीमिर्च और बादाम की गिरी बराबर भाग में लेकर थोड़ा-सा सोंठ मिलाकर चूर्ण कर लें। भोजन के बाद गर्म दूध के साथ खाने से यह रोग दूर हो जाता है।

24. शीशम : रात में एक मिट्टी के बर्तन में पानी रखें शीशम के हरे और कोंमल पत्तों को रखकर ढ़क दें। सुबह इन्हें निचोड़कर छान लें और ताल मिश्री को मिलाकर खाने से लाभ होता है।

25. शीतलचीनी : 2 चम्मच शीतल चीनी पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

26. तुलसी :

तुलसी के बीजों को पीसकर पानी के साथ या बीजों को गुड़ के साथ कुछ दिनों तक लेने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है।
तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में लेकर पुराने गुड़ के साथ बराबर मात्रा में खाने के बाद एक कप दूध सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बन्धी सभी समस्याएं दूर हो जाती है।
3 ग्राम तुलसी के बीज या जड़ का चूर्ण बराबर की मात्रा में पुराने गुड़ में दूध के साथ सेवन करने से पुरुषत्व की वृद्धि होती है। इससे पतला वीर्य गाढ़ा होता है तथा वीर्य की वृद्धि होती है।
तुलसी के बीज 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम लें। इन दोनों को पीसकर सुरक्षित रख लेते है। इसमें प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण गाय के दूध से सेवन करना चाहिए।

27. कसेरू : कसेरू के छिलके को हटाकर रस निकालें और दूध, मिश्री के साथ रोज पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।

28. सोंठ : सोंठ को गर्म पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। उसमें थोड़ी हल्दी और गुड़ को डालकर पीने से धातु (वीर्य) की कमजोरी दूर होती है।

29. लाजवन्ती : लाजवन्ती के बीजों का चूर्णकर के दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

30. धनिया : धनिया का चूर्ण बनाकर ईसबगोल की भूसी और मिश्री मिलाकर गर्म दूध के साथ खाने से स्वप्नदोष, कब्जियत और शीघ्रपतन दूर होता है।

31. सफेद मूसली : सफेद मूसली और शक्कर बराबर मिलाकर चूर्ण कर लें और रोज सवेरे गाय के दूध के साथ खाने से लाभ मिलता है।

32. गाजर : गाजर का रस शहद के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।

33. लहसुन : रोज रात में 1-2 कली लहसुन जरूर खायें या लहसुन का रस शहद के साथ खायें इससे धातु (वीर्य) की कमजोरी, शीघ्रपतन और नपुंसकता दूर होती है।

34. बबूल :

बबूल का पत्ता चबाकर गाय का दूध पीने से कुछ की दिनों में गर्मी के रोग में लाभ होता है।
बबूल के कच्ची फलियों के रस को दूध और मिश्री में मिलाकर खाने से लाभ होता है।

35. रीठा : रीठे की गिरी को पीसकर बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर एक चम्मच की मात्रा सुबह-शाम एक कप दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है।

36. मूसलीकन्द : 3 से 6 ग्राम मूसलीकन्द के चूर्ण, मिश्री को मिलाकर धातु की कमी के रोग में सेवन करने से लाभ होता है।

37. गेंदा : एक चम्मच गेंदे के बीजों और इतनी ही मात्रा में मिश्री को मिलाकर एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करने से वीर्य स्तम्भन की शक्ति बढ़ती है।

38. गन्ना : गुड़ को आंवलों के 2-4 ग्राम चूर्ण के साथ सेवन करने से वीर्यवृद्धि, श्रमनाश, तृप्ति, रक्तपित्त, दाह, शूल और मूत्रकृच्छ आदि रोग नष्ट होता है।

38. इमली :

इमली को पानी में कुछ दिन भिगोकर छिलका उतार दें। छिलके निकले बीजों को सुखाकर बारीक पीस लें। एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार दूध के साथ सेवन करने से वीर्य का पतलापन दूर होता है।
इमली के बीजों को भूनकर छिलका उतारकर चूर्ण बनाकर, बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर 15 दिनों तक रोजाना सेवन करने से वीर्य का पतलापन, मूत्रकृच्छ तथा मूत्रदाह (पेशाब में जलन) दूर होती है।

39. सफेद पेठा : पेठे की मिठाई और सब्जी खाने से वीर्य बढ़ता है। इसके अलावा यह औरतों के श्वेतप्रदर को बन्द करता है और मोटापे को भी कम करता है।

40. कैथ : कैथ के पेड़ की कोंपलों का चूर्ण दूध में मिलाकर शक्कर के साथ लेने से वीर्य में वृद्धि होती है।

41. खस (पोस्त के दाना) : खस की जड़, तालमखाना और सफेद चंदन का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच एक कप दूध के साथ सुबह-शाम रोज 4 से 6 हफ्ते खाने से धातु की कमी दूर होती है।

42. ब्राह्मी : वीर्य दोष में 15 ब्राह्मी के पत्तों को दिन में 3 बार सेवन कर सकते हैं।

Improve your sperms Quality ओर वीर्य के दोष दूर करें


वीर्य के दोष दूर करें

परिचय :
वीर्य ही शरीर की सप्त धातुओं का राजा माना जाता है और ये सप्त धातुयें भोजन से प्राप्त होती हैं। इसमे सातवी धातु ही पुरुष में वीर्य बनती है। 100 बूंद खून से एक बूंद वीर्य बनता है। एक महीने में लगभग 1 लीटर खून बनता है जिससे 25 ग्राम वीर्य बनता है और गर्भाधान के लिए 60 से 70 करोड़ जीवित शुक्राणुओं का होना जरूरी होता है। इसलिए संभोग हफ्ते में एक बार ही करना चाहिए क्योंकि एक बार के संभोग के दौरान 10 ग्राम वीर्य निकल जाता है। वीर्य में जीवित शुक्राणुओं की कमी से महिलाओं को गर्भवती भी बनाया नहीं जा सकता। वीर्य परीक्षण में वीर्य गर्भाधान के लिए 7.8 पी.एच से 8.2 पी. एच ही सही माना गया है। वीर्य में दो प्रकार के शुक्राणु होते हैं एक्स और वाई। एक्स शुक्राणुओं से पुत्री पैदा होती है और वाई शुक्राणुओं से पुत्र पैदा होता है। एक शुक्राणु की लम्बाई लगभग 1/500 इंच होती है।

कभी-कभी वीर्य पतला होने के कारण गर्भ नहीं ठहरा पाता ऐसा तब होता है जब कोई ज्यादा मैथुन करके वीर्य को नष्ट कर देता है या अन्य दूसरी किसी बीमारी से ग्रस्त होकर जैसे:- प्रमेह, सुजाक, मूत्रघात, मूत्रकृच्छ और स्वप्नदोष आदि।

चिकित्सा :

1. ब्राह्मी : ब्राह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदण्डी और कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।

2. बबूल :

बबूल की कच्ची फली को सुखाकर मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी व रोग दूर होते हैं।
10 ग्राम बबूल की कोंपलों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। हरी कोंपले न हों तो 30 ग्राम सूखी कोंपलों का सेवन कर सकते हैं।
बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीसकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होगा और सभी विकार दूर हो जाएंगे।
बबूल की गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है।
बबूल का पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) लेकर पीस लें, और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में लाभ मिलता है।
बबूल की कच्ची फलियों के रस में 1 मीटर लंबे और 1 मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे पुन: भिगोकर सुखाते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते है, और प्रतिदिन एक टुकड़े को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि हो जाती है।

3. शतावर :

शतावर रस या आंवला रस अथवा गोखरू काढ़ा शहद में मिलाकर पीने से वीर्य शुद्ध होता है।
शतावर, सफेद मूसली, असगन्ध, कौंच के बीज, गोखरू और आंवला ये सभी बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें तीन-तीन ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) में वृद्धि होती है।

4. गूलर :

गूलर का दूध बताशे में रख कर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।
पके गूलर का चूर्ण शहद या सेंधा नमक के साथ खाने से भी वीर्य शुद्ध होता है।

5. धनिया : धनिया, पोस्त के बीज के साथ मिश्री मिलाकर खाना लाभदायक होता है।

6. छोटी दुधी : छोटी दुधी का चूर्ण मिश्री मिलाकर दूध के साथ खायें इससे वीर्य शुद्ध होता जाता है।

7. तालमखाना : तालमखाना मे मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध यानी साफ हो जाता है।

8. चोबचीनी : चोबचीनी, सोठ, मोचरस, दोनों मूसली, काली मिर्च, वायविडंग और सौंफ सबको बराबर भाग में लेकर चूर्ण बनायें। बाद में 10 ग्राम की मात्रा में रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिला दूध पी लें इससे वीर्य साफ होता है।

9. सांठी : सांठी की जड़ और काली मिर्च को पीसकर घी के साथ मिलाकर खाने से वीर्य शुद्ध होता है।

10. जायफल :

जायफल, जावित्री, माजूफल मस्तगी, नागकेसर, अकरकरा, मोचरस, वनशलोचन, अजवायन, छोटी इलायची दाना 10-10 ग्राम कूट कर छान लें। कीकर की गोंद में चने बराबर गोलियां बना छाया में सूखा लें। 1-1 गोली सुबह-शाम दूध या पानी से लें।
जायफल 1 ग्राम रूमीमस्तगी, लौंग, छोटी इलायची दाना 2-2 ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें, संभोग (सहवास) से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें।
11. राल : राल को बारीक पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी से वीर्य के रोग में सेवन करें।

12. दालचीनी :

दालचीनी 20 ग्राम पीसकर इसमें खांड़ 20 ग्राम मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
दालचीनी और काले तिल 5-5 ग्राम पीस लें उसके बाद शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में सुखा दें। संभोग से 2 घंटे पहले एक गोली गर्म दूध से लें।
3 ग्राम दालचीनी का चूर्ण रात में सोते समय गरम दूध के साथ खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।
दालचीनी को बहुत ही बारीक पीस लेते हैं। इसे 4-4 ग्राम सुबह व शाम को सोते समय दूध से फांके। इससे दूध पच जाता है और वीर्य की वृद्धि होती है।

13. वंशलोचन : वीर्य दोष दूर करने के लिए वनंशलोचन 30 ग्राम और छोटी इलायची 3 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम घी व खांड़ में मिलाकर लें।

14. इमली :

300 ग्राम इमली के बीज को 500 मिलीलीटर पानी में 3 दिन तक भिगोयें। फिर इसका छिलका उतार कर छायां में सुखाकर अच्छी तरह पीसकर 10-10 ग्राम की मात्रा मे सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें।
इमली के बीजों के छोटे-छोटे टुकड़े कर रातभर पानी मे भिगा कर खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

15. लाजवन्ती : लाजवन्ती को संभोग के समय मुंह में रखने से वीर्य स्तंभन हो जाता है।

16. कीकर :

कीकर की गोंद 100 ग्राम भून लें इसे कूट कर असगंध पिसी 50 ग्राम मिलाकर रख दें। 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें।
कीकर के पत्ते छाया में सूखे 50 ग्राम कूट छानकर इसमें 100 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।

17. राई : राई, लौंग 5-5 ग्राम दालचीनी 10 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।

18. सिम्बल : सिम्बल की जड़ 100 ग्राम कूटछान कर इसमें खांड़ 100 ग्राम मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम गर्म दूध के साथ प्रयोग करने से वीर्य दोष दूर होते हैं।

19. असगंध नागोरी :

असगंध नागोरी, विधारा, सतावरी 50-50 ग्राम कूट छानकर रखें और 150 ग्राम खांड मिलाकर रखें। 10-10 ग्राम दूध से सुबह-शाम लें।
नागौरी असगंध, गोखरू, शतावर तथा मिश्री मिलाकर खायें।

20. वंशलोचन : 60 ग्राम वंशलोचन को पीसकर रखें। इसमें 40 ग्राम खांड़ मिलाकर रख लें। 5-5 ग्राम को सुबह-शाम दूध के साथ लेने से लाभ होता है।

21. फिटकरी : 30 ग्राम भुनी फिटकरी को 60 ग्राम खांड़ में मिलाकर रखें। 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

22. कमलगट्ठा : कमल गट्ठा या बीज पीसकर शहद में मिलाकर नाभि पर लेप करने से वीर्य स्तम्भन हो जायेगा।

23. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ 2 अंगुल की कमर में बांधने से वीर्य स्तम्भन हो जाता है।

24. सौंठ : सौंठ, बूटी हजारदाना, नकछिकनी 50-50 ग्राम कूट छान कर 5-5 ग्राम सुबह-शाम कम गर्म दूध से लें। सौंठ, सतावर, गोरखमुण्डी 10-10 ग्राम पीसकर शहद मिला कर चने कें बराबर गोलियां बनाकर छायां में सुखा लें। सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 गोली दूध या पानी के साथ लें। वीर्य दोष में लाभ मिलेगा।

25. असगंध :

असगंध, विधारा 25-25 ग्राम कूट छान कर इसमें 50 ग्राम खांड को मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा मे सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से बल वीर्य बढ़ता है।
असगंध 300 ग्राम कूट छान कर 20 ग्राम को दूध 250 मिलीलीटर में गिराकर उबालें गाढ़ा होने पर खांड़ मिला कर पी लें।

26. बहमन : बहमल लाल 50 ग्राम पीसकर 5 ग्राम को सुबह कम गर्म दूध के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति बढ़ती है।

27. मुनक्का : 250 मिलीलीटर दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड़ मिला कर सुबह पीये।

28. कालीमिर्च : कालीमिर्च के साथ गोंदी के पत्ते मिलाकर घोटकर शर्बत की तरह 21 दिन तक पीने से वीर्य पुष्ट होता है।

29. गंगेरन : गंगेरन की जड़ की छाल के चूर्ण में उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा दूध के साथ 7 दिनों तक खायें वीर्य पुष्ट होता है।

30. बदुफली : बदुफली के पौधे को थोडे पानी के साथ पीसकर कपड़े में छानकर रस को निकाल लें। 100 मिलीलीटर रस में 10 ग्राम शक्कर और आधे से एक ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर 7 दिनों तक सुबह-शाम पीने से वीर्य बढ़ता है।

31. बरगद :

बरगद के फल को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। गाय के दूध के साथ 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है।
बरगद की कोंपल 10 ग्राम, गूलर की छाल 10 ग्राम, शक्कर 20 ग्राम को मिलाकर चूर्ण बना लें। 21 दिन तक 10 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।
25 ग्राम बरगद की कोपले लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब एक चोथाई पानी बचे तो इसे छानकर 500 मिलीलीटर दूध में डालकर पकायें। इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम शक्कर मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है।
बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है।

32. विधारा : 100 ग्राम विधारा की जड़ को 1 लीटर दूध में पकाकर और घी मिलाकर रख लें। भोजन के बाद रोज 20 ग्राम की मात्रा में खाने से वीर्य (धातु) पुष्ट होता है।

***33. केला :

पके केले को सुखाकर चूर्ण बना लें। रोज 10 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खाने से वीर्य में लाभ होता है।
1 पका केला 5 ग्राम को घी के साथ सुबह और शाम 7 दिनों तक खाने से धातु के रोग खत्म होते हैं। अगर ठंड़ा लगे तो उसमें 4-5 शहद की बूंद मिलाकर सेवन करें।

34. इन्द्रायण : इन्द्रायण की गिरी को पानी के साथ खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

35. निर्गुण्डी : निर्गुण्डी, सालम मिश्री, तालमखाना, शतावरी और विदारीकन्द 40-40 ग्राम को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। 20 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम दूध में मिलाकर इलायची से मथकर सुबह-शाम पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।

36. बेर : बेर की मिंगी की गुठली को गुड़ के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।

37. गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के फूलो को पीसकर प्राप्त चूर्ण में शक्कर को मिलाकर खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

38. जवाखार : 1 ग्राम जवाखार में 10 ग्राम शक्कर में मिलाकर पानी के साथ खाने से पेशाब के बाद वीर्य का गिरना रुक जाता है।

39. गिलोय : गिलोय का सत और असली वशंलोचन बराबर लेकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम की मात्रा में शहद को मिलाकर 7 दिनों खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।

40. सत्यानाशी : सत्यानाशी की जड़ की छाल लगभग ग्राम से 1 ग्राम तक दूध के साथ लेने से वीर्य-सम्बन्धी सभी रोग मिट जाते है।

41. अफीम : अफीम 0.3 ग्राम के घोल में एक मुठ्ठी चने भिगोकर सुबह-शाम अंकुरित होने पर 1-1 चना चबा लें। केवल 21 दिन तक यह प्रयोग करने से स्वप्नदोष, धातु (वीर्य) कमी दूर होती है।

42. बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू की कांटी बनाकर खाने से वीर्य-सम्बन्धी सारे रोग दूर होते हैं।

43. कपूर : लगभग एक ग्राम का चौथा भाग कपूर और अफीम की गोली बनाकर रात को सोते समय खाने से वीर्य-सम्बन्धी रोग मिट जाते हैं।

44. महुआ : महूए की छाल का 2 से 3 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार-सुबह और शाम को गाय के घी, दूध, और चीनी के साथ पीने से पुरूष के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है।

45. चना :

एक मुट्ठी सेंके हुए चने या भीगे हुए चने और 5 बादाम खाकर दूध पीने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य गाढ़ा हो जाता है।
भीगी हुई चने की दाल में चीनी को मिलाकर रात को सोते समय खा लें, ऊपर से पानी न पियें। इससे धातु पुष्ट होती है।

46. आम :

आम के मौर (आम के फूल) छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें मिश्री को मिलाकर 1-1 चम्मच दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होगा।
आम के फूलों के चूर्ण को 5-10 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से स्तम्भन और कामशक्ति की वृद्धि होती है।

47. जामुन : वीर्य का पतलापन हो, जरा सी उत्तेजना से ही वीर्य का निकल जाना हो तो ऐसे में 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण रोज शाम को गर्म दूध से लें। वीर्य का पतलापन की बीमारी दूर होती है और वीर्य भी बढ़ जाता है।

48. आंवला : 1 चम्मच घी में 2 चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में 3 बार कम-से-कम 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।

49. मुलहठी : 3 ग्राम मुलहठी जड़ (मूल) का चूर्ण, 3 ग्राम घी और 2 ग्राम शहद दिन में 3 बार धातुक्षय के रोग में सेवन करें।

50. छोंकर : छोंकर और किंकिरात के फूलों को बराबर मात्रा में लेकर थोड़े से जीरे के साथ पीसकर उसे लगभग 250 ग्राम पानी में डालकर छान लें। इसके बाद उसमें 20 ग्राम चीनी पीने से धातु की पुष्टि होती है।

51. चीकू : चीकू को शर्करा के साथ खाने से धातुपुष्टि होती है।

52. दूध :

सुबह नाश्ते में एक केला, 10 ग्राम देशी घी के साथ खाकर ऊपर से दूध पी लें। दोपहर के बाद 2 केले, 29 ग्राम खजूर को 1 चम्मच देशी घी में डालकर खाकर ऊपर से दूध पीयें। धातुपुष्टि होती है।
ताजा दूध निकालकर छानकर बिना गर्म किये ही उसके अन्दर मिश्री या शहद और भिगोई हुई किशमिश का पानी मिलाकर लगातार 40 दिन पीने से पुरुष का वीर्य बढ़ता है तथा आंखों की रोशनी भी तेज होती है। यह दूध खांसी, स्नायुदौर्बल्य (नरवस सिस्टम), बच्चों का सूखा रोग, क्षय रोग (टी.बी) हिस्टीरिया हृदय की धड़कन आदि रोगों में भी बहुत उपयोगी है। छोटे-छोटे कमजोर बच्चों को यह दूध पीने से लाभ मिलता है।

53. कालीमिर्च : 1 गिलास दूध में 8 से 10 कालीमिर्च का चूर्ण डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर ठंड़ा करके सुबह-शाम रोज खानें से वीर्य की पुष्टी होती है।

54. गेहूं : 100 ग्राम गेहूं रात को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के समय उसी पानी से उन्हें पत्थर पर पीसने के बाद लस्सी बना लें। इसमें स्वाद के लिए चीनी मिला लें। पेशाब के साथ वीर्य के आने का रोग सिर्फ 7 दिन तक यह प्रयोग करने से दूर हो जाता है।

55. कनेर : कनेर की जड़ को घिसकर लिंग पर लेप करने से धातु रोग व गर्मी से होने वाले रोग में लाभ होता है।

56. कसौंदी : कसौंदी के जड़ का बारीक चूर्ण 1-4 ग्राम की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य बढता है और धातु का क्षय रोग भी ठीक हो जाता है।

57. अलसी : अलसी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिसरी मिलाकर दो बार नियमित रूप से दूध के साथ कुछ हफ्ते तक पीने से वीर्य बढ़ता है।

58. कालीमिर्च : कालीमिर्च और शहद के साथ तीसी का सेवन कामोद्दीपक तथा वीर्य को गाढ़ा करने वाला होता है।

59. सेहुण्ड : गीली शतावर को चीरकर बीच के तिनके को निकाल कर दूध के साथ पिसी मिश्री मिलाकर खाने से वीर्य बढ़ता है।

60. खजूर :

ठंड में सुबह खजूर को घी में सेंककर खिलायें इस पर इलायची, शक्कर और कौंच को डालकर उबाले हुऐ दुध को पीने से वीर्य बढ़ता है।
अच्छा छुहारा लेकर, बीज निकालकर थोडा-सा कूटकर उसमें बादाम, बलदाने, पिश्ता, चिरौंजी, शक्कर आदि मिलाएं। इसे 8 दिन तक घी में मिलाकर रख दें। उसमें से रोज 20 ग्राम खाने से धातु पुष्टि होती है और पित्त को शान्त करता है।

61. अमरूद : अच्छी तरह पके नरम, मीठे अमरूदों को मसलकर दूध में फेंट लें और फिर छानकर इनके बीज को निकालकर उसमें आवश्यकतानुसार चीनी मिलाकर सुबह नियमित रूप से 21 दिन सेवन करें।

62. पीपल :

पीपल के फल को पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में 1 कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करते रहने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होकर बल, वीर्य (धातु) और पौरुष शक्ति बढ़ती है।
100 ग्राम पवांड़ (चक्रमर्द) के फूल और 10 ग्राम चीनी को मिलाकर रोजाना सुबह खाने से कुछ ही दिनों मे वीर्य का रोग समाप्त हो जाता है।
पीपल के तने की 50 ग्राम सूखी छाल की राख, उपदंश पर छिड़कने से धातु (उपदंश) शुष्क होकर ठीक हो जाता है।

63. लता करंज : करंज के पत्तों का रस हथेली और तलुओं पर मालिश करने से वीर्य गाढ़ा होता है। इसके एक बीज को सहवास के समय मुंह में चबाने से भी वीर्य गाढ़ा होता है।

64. पानी : ठंडे पानी से नहाने से स्वप्नदोष और वीर्य के रोगों में लाभ होता है।

65. अंजीर : सूखे अंजीर के टुकड़ों एवं बादाम के गर्भ को गर्म पानी में भिगोकर रख दें फिर ऊपर से छिलके निकालकर सुखा दें। उसमें मिश्री, इलायची दानों का चूर्ण, केसर, चिरौंजी, पिश्ता और बलदाने कूटकर डालें और गाय के घी में 8 दिन तक भिगोकर रखें। यह मिश्रण प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम की मात्रा में खाने से क्षीण शक्ति वालों के खून और वीर्य में वृद्धि होती है।

66. इलायची :

इलायची के दाने, जावित्री, बादाम की गिरी, गाय का मक्खन और चीनी को एकत्रित करके रोजाना सुबह के समय खाने से धातु पुष्ट होती है और वीर्य गाढ़ा होता है।
इलायची के दाने और ईसबगोल बराबर मात्रा में लेकर आंवले के रस में खरल करके छोटी-छोटी गोलियां बनाकर 1-1 गोली सुबह-शाम लेने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

67. अतीस : 5 ग्राम अतीस के चूर्ण को शक्कर और दूध के साथ देने से वीर्य बढ़ता है।

नोट:शराब या किसी भी प्रकार का नशा वीर्य की ताक़त को खत्म करने का काम करता है ।जब बच्चे की प्लानिंग करें तब से गर्भ धारण तक किसी भी प्रकार का नशा ना करे।केवल फलो के रस और बताई गई जानकारी का सेवन करे खाना खाने के साथ साथ।

स्वप्नदोष Or Self-infliction

परिचय :
रात के समय सोते हुए अपने आप या अश्लील स्वप्न देखते हुए वीर्य का निकल जाना ही स्वप्नदोष कहलाता है।

कारण :

फिल्मों में अश्लील दृश्यों को देखना, स्कूल कॉलजों मे लड़के- लड़कियों का खुले मे घूमना, नवयुवकों के सर में हमेशा कामवासना का ध्यान रहना, लड़कियों के बारे ज्यादा सोचना, उनके अंगों को कामुक नजरों से देखना, अधिक मैथुन करना, किसी लड़की के स्पर्श करने पर सोचना, सहवास में खोये रहना मसालेदार भोजन खाने, चाय, शराब व रात को गर्म दूध पीना ही स्वप्नदोष का कारण बनता हो सकता है।

कभी-कभी यह कारण न होकर इसका उलटा होता है। जैसे हार्मोन के बढ़ने पर वीर्य ज्यादा बनने लगते हैं। इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है और वीर्य अपने आप रात में या जरा सी गर्मी होते ही बाहर निकल पड़ता है। इसमें रोगी का कोई दोष नहीं होता है। स्वप्नदोष अगर महीने या साल में होता है तो डरने की कोई बात नहीं मगर रोज या हफ्ते में हो तो इसका उपचार जल्द से जल्द कराना चाहिए नहीं तो रोगी नपुंसक भी बन सकता है।


लक्षण :

इस रोग से ग्रस्त रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है। चेहरे की चमक खत्म हो जाती है। रात मे सोते समय ही वीर्य निकल जाता है। भूख की कमी, बैचेनी, बुखार, हाथ-पैरों के तलवे में जलन, वीर्य का पतला पन, आलस्य, कमर में दर्द, स्वरभंग, नजर का कमजोर होना आदि लक्षण दिखाई देने लगता है।

भोजन तथा परहेज :

शिश्न को रोज सुबह के समय 10 मिनट तक ठंड़े पानी की धार से धोयें। मानसिक शान्ति तथा सुबह-शाम टहलना भी जरूरी है। रोज व्यायाम करें तथा त्रिफला चूर्ण एक चम्मच गर्म पानी से खाना खाने के बाद लें।

गर्म पदार्थ, रात को सोने से पूर्व गर्म दूध, गुड़, सिगरेट, शराब आदि का सेवन न करें और पेट में कब्ज न बनने दें।

चिकित्सा :

1. मुलहठी :

मुलहठी के चूर्ण को मक्खन और शहद के साथ मिलाकर खाने से लाभ होता है।
मुलहठी के चूर्ण में 2 ग्राम की मात्रा में शहद और घी मिलाकर खाने से स्वप्नदोष की बीमारी खत्म हो जाती है।

2. बबूल :

बबूल की गोंद 10 ग्राम मात्रा में रात को 100 मिलीलीटर पानी में डालकर रख दें। सुबह उठने पर गोंद को थोड़ा-सा मसलकर पानी में छानकर मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में बहुत लाभ होता है।
बबूल की फली का चूर्ण 3 से 6 ग्राम चीनी में मिलाकर सुबह-शाम खाने से लाभ मिलता है।

3. चोपचीनी : चोपचीनी का पिसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम और घी 10 ग्राम मिलाकर 7 दिनों तक खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

4. बादाम :

बादाम के एक बीज की गिरी, 3 ग्राम मिसरी, 3 ग्राम घी और 3 ग्राम गिलोय का चूर्ण इन सबको 6 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद में मिलाकर 7 दिनों तक दिन मे सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।
बादाम और काली मिर्च की फीकी शर्बत पीने से भी स्वप्नदोष में लाभ होता है।

5. त्रिफला :

त्रिफले का चूर्ण और शहद दोनों को मिलाकर खाने से स्वप्नदोष में बहुत लाभ होता है।
त्रिफला का चूर्ण 4-6 ग्राम की मात्रा में रात को सोने से पहले दूध के साथ खाने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है।
त्रिफला 12 ग्राम, गुड़ 24 ग्राम, वच और भीमसेनी कर्पूर 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर सबको पानी के साथ मिलाकर छोटी-छोटी एक समान गोली बना लें, 1 से 2 गोलीयों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष व शीघ्रपतन दूर हो जायेगा।

6. आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम और मिसरी का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर रोज खाने से कुछ हफ्ते में स्वप्नदोष खत्म होता है।

7. शतावर :

शतावर, मूसली, विदारीकन्द, असगंध, गोखरू या इलायची के बीज इनमें से 2-3 वनौशधि को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर पीसकर रख लें, और मिश्री को मिलाकर 3 ग्राम पानी के साथ पीने से लाभ होता है।
शतावरी, असगंध, विधारा 20-20 ग्राम कूटकर छानकर रख लें, इसमें 60 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में दिन सुबह-शाम दूध के साथ लें।
शतावर के रस को शहद मे मिलाकर पीने सुबह-शाम से स्वप्नदोष दूर होता है।

8. हरड़ :

हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद 10 ग्राम में लेकर में मिलाकर रोज खायें इससे कुछ दिनों में स्वप्नदोष का रोग खत्म हो जाता है।
हरड़ का मुरब्बा खाकर हल्का गर्म दूध पीने से कब्ज दूर होती है।

9. खादिर (कत्था) : खादिर (कत्था) सार 1 ग्राम, ठंड़े पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

10. गिलोय : गिलोय, गोक्षुर और आंवला तीनों को बराबर मात्रा में कूट पीसकर 1 चम्मच चूर्ण को खाकर पानी को पीने से स्वप्नदोष खत्म होता है।

11. गुलाब :

गुलाब के फूल और छोटी दूधी का चूर्ण बराबर मिश्री मिलाकर पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष के दोष को खत्म करता है।
गुलाब के 4-5 फूल तोड़कर उन्हे साफ पानी से धोयें और पंखुड़ियां अलग करके उनमें उतनी ही मिश्री का चूर्ण मिला कर सुबह-शाम खाकर और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें। इसका प्रयोग कुछ दिनों तक कर सकते हैं।
गुलाब का शर्बत पीने से भी स्वप्नदोष पर लाभ मिलता है।

12. गुलकन्द : गुलकन्द 5-10 ग्राम की मात्रा मे रोजाना सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ मिलता है।

13. बड़ी गोक्षुर : बड़े गोक्षुर के चूर्ण में घी मिलाकर रोज खाने से स्वप्नदोष दूर होता है।

14. गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला और हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ खाने से स्वप्नदोष का रोग दूर होता है।

15. धनिया :

2 ग्राम धनिये को पीसकर उसमें 3 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर कुछ दिनों तक पानी के साथ पीने से स्वप्नदोष का रोग खत्म होता है।
सूखे धनिये तथा मिश्री को बराबर मात्रा में कूटकर चूर्ण बना लें और किसी ढक्कनदार बर्तन में भरकर रख दें। इस चूर्ण में से 5-6 ग्राम के लगभग, ताजा जल के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लेने से अनैच्छिक वीर्यपात, स्वप्दोष आदि विकारों से मुक्ति मिल जाती है।
सूखा धनिया कूट, पीसकर छान लें। इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई चीनी मिला लें। सुबह खाली पेट बासी पानी से 1 चम्मच की फंकी लें और 1 घण्टे तक कुछ न खायें, पीयें। इसी तरह 1-1 खुराक शाम को 5 बजे सुबह के पानी के साथ लें। अगर कब्ज हो तो रात को सोने के समय 2 चम्मच ईसबगोल की भूसी गरम दूध से लें। इससे स्वप्नदोष की बीमारी दूर हो जाती है।
धनियां, नीलोफर, कुर्फा के बीज, काहू के बीज,कासनी के बीज और शीतलचीनी 20-20 ग्राम, अलसी के दाने 100 ग्राम और ईसबगोल 25 ग्राम की मात्रा में सबको कूट कर छान लें। फिर इस चूर्ण से 2-3 ग्राम की मात्रा मे लेकर बराबर भाग में मिश्री को मिलाकर पानी के साथ सुबह-शाम लें।

16. जामुन :

4 जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष ठीक हो जाता है।
जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण रोज सुबह-शाम पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष की बीमारी दूर होती है।
17. केला :

रोज 2 केले काटकर थोड़ा सा शहद मिलाकर खाने से स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
2 केले खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीयें यह 3 महीने तक करते रहने से शीघ्रपतन में लाभ होगा।

18. नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ, बायबिण्डग 10-10 ग्राम कूट छानकर उसमें 30 ग्राम खांड़ को मिलाकर 5 ग्राम की मात्रा को खुराक के रूप में सुबह खाली पेट कच्चे दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

19. तुलसी :

तुलसी के बीज को सुबह-शाम पानी से लाभ होता है। ध्यान रहें कि रात को गरम दूध न पीयें।
तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में सोने से पहले नियमित रूप से कुछ हफ्ते तक पीना चाहिए। इससे स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है।

20. असगंध : असगंध, विदारीकन्द 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

21. असरोल : असरोल, धनियां 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम सोते समय रात को पानी के साथ सेवन करें।

22. अजवायन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधे ग्राम कपूर की गोली मिलाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

23. बड़ी गोखरू :

बड़ी गोखरू की फांट या घोल को सुबह-शाम प्रयोग करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।
बड़ी गोखरू के फल का 25 ग्राम चूर्ण 250 मिलीलीटर उबलते पानी में डालकर छोड़ दें। 1 घंटे बाद छान लें। इसमें से थोड़ा-सा बार-बार पिलाने से स्वप्नदोष दूर होता है।
शक्कर और घी बड़ी गोखरू के साथ खायें और ऊपर से दूध पी लें इससे भी स्वप्नदोष में लाभ होता है।

24. समुद्रशोष : 3 से 6 ग्राम समुद्रशोष के बीजों को पानी में भिगों कर उससे बने लुआवदार घोल में मिश्री मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से वीर्य का स्तम्भन होता है।

25. कपूर :

लगभग एक ग्राम के चौथे भाग कपूर की गोली खुरासानी अजवायन के साथ सोने से पहले रोज रात में खाने से स्वप्नदोष में जरूर लाभ होगा।
लगभग एक ग्राम का चौथा भाग कपूर और एक चम्मच चीनी दोनों पीसकर रोज सोते हुए फंकी लेने से स्वप्नदोष होना बन्द हो जाता है।

26. लहसुन : रात को सोने से पहले हाथ, पैर और मुंह को धोकर पोछ लें फिर लहसुन की 1 कली मुंह में चबा-चबाकर खाने से स्वप्नदोष के रोग में लाभ मिलता है।

27. प्याज : 10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 8 मिलीलीटर अदरक का रस, शहद 5 ग्राम और घी 3 ग्राम मिलाकर रात को सोने से पहले पिलाने से स्वप्नदोष नहीं होता है।

28. पीपलामूल : पीपलामूल 30 ग्राम और गुड़ 40 ग्राम को मिलाकर 1-1 ग्राम की गोली बनाकर सेवन करने से स्वप्नदोष नहीं होता है और नीन्द अच्छी आती है।

29. अमरबेल : अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।

30. फिटकरी : फिटकरी की 50 ग्राम चिकनी-सी डली रात में सोने से पहले पेडु यानी नाभि पर रख लें इससे रात में स्वप्नदोष नहीं होगा।

31. छिरेंहटी :

छिरेंहटी के सूखे पत्ते 50 ग्राम, हरड़, बहेड़ा और आमला 20-20 ग्राम, बबूल का गोंद 25 ग्राम और कतीरा गोंद 10 ग्राम। सबको कूट छान कर छिरेंहटा के ही रस में खरल करके, बारीक चूर्ण के रूप में ही शीशी में भर कर रखें। 5-6 ग्राम यह चूर्ण ताजा पानी के साथ सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष और वीर्य की कमी को दूर होती है।
छिरेंहटी के सूखे पत्ते 200 ग्राम तथा गाय के घी के साथ भूनी हुई छोटी हरड़ 50 ग्राम को पीस-छान कर दोनों के बराबर मिश्री मिला ले और 10-15 ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे स्वप्नदोष मे लाभ होता है।
छिरेंहटी का पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) सूखे हुए 50 ग्राम, सूखी हुई दुर्बा 25 ग्राम, छोटी इलायची के बीज और कतीरा गोंद 12-12 ग्राम तथा मिश्री 100 ग्राम आदि को एक साथ लेकर अच्छी तरह से कूट लें। फिर इस बने चूर्ण को 10-12 ग्राम सुबह-शाम गाय के गर्म दूध के साथ खायें। इससे प्रमेहजन्य (वीर्य विकार से उत्पन्न रोग) अनेक उपसर्ग दूर होते हैं। वीर्य का पतलापन और स्वप्नदोष दूर होता है।
छिरेंहटी के हरे पत्ते 10-12 ग्राम और 5-6 काली मिर्च लेकर बारीक पीस लें। चाहे तो बादाम की छिली हुई मींगियां और सौंफ भी मिला सकते है। रोज कुछ दिनों तक खाने से लाभ मिलता है।
छिरेंहटी का रस और गिलोय का रस बराबर भाग लेकर उसके साथ शहद मिला लें और खायें इससे शीघ्रपतन और स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
छिरेंहटी को आमले के रस में खरल करके मिश्री या शहद के साथ मिलाकर 15-20 ग्राम की मात्रा में लेकर स्वप्नदोष के रोगी को खिलायें।
छिरेंहटी छाया में सुखा कर चूर्ण कर लें और कतीरा के गोद में 12 घंटे डुबोकर 1 ग्राम की गोली बनाकर 12 घंटे छाया में सुखा लें। 1 से 2 गोली को खुराक के रूप में ताजा पानी के साथ, सुबह-शाम खाने से लाभ मिलेगा।

32. वंशलोचन :

वंशलोचन का चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम को सुबह-शाम गाय के दूध के साथ 40 दिनों तक खाने से लाभ मिलता है।
वंशलोचन, शुद्ध शिलाजीत छोटी इलायची, सफेद मिर्च, मस्तंगी, शीतलचीनी, कुन्दरू, राल और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर, चंदन के तेल के साथ कूट लें और मटर के बराबर गोली बना कर रोज 1-2 गोली ताजा पानी के साथ सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष मिट जाता है। साथ ही पेशाब के संग आने वाला घात, पेशाब की रुकावट आदि भी दूर होती है।
वंशलोचन और शिलाजीत 40-40 ग्राम लेकर पीसकर रखें, फिर इसमें 10 ग्राम सत गिलोय को मिलाकर 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ रोगी को सुबह-शाम सेवन करके ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध पिलाने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

33. रूमीमस्तगी : रूमी मस्तगी को घी के साथ भून लें। 1 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लेने से पित्तज स्वप्नदोष दूर होता है।

34. कतीरा : कतीरा गोंद खाने से भी स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

35. ढाक : ढाक के फूल, बबूल के फूल, लाजवन्ती के फूल, कबाब चीनी और धनिया बराबर भाग लेकर ठंड़े ताजा पानी के साथ सिल पर, मिश्री मिलाकर घोंटकर शर्बत बना कर स्वप्नदोष से पीड़ित रोगी को सेवन करायें।

36. इमली : इमली के थोड़े-से बींजो को दूध में भिगोकर छिलका उतार लें। फिर उसमें उतनी ही मात्रा में मिश्री को मिलाकार पीसकर चटनी बनाकर 1 चम्मच चटनी को खुराक के रूप में रोज 20 दिन तक दूध के साथ स्वप्नदोष में रोगी को प्रयोग कराने से लाभ होता है।

37. आंवला :

एक मुरब्बे का आंवला रोजाना खाने से स्वप्न दोष में लाभ होता है।
कांच के गिलास में सूखे आंवले को पीसकर 20 ग्राम की मात्रा में डालें। इसमें 60 मिलीलीटर पानी भरें और फिर 12 घंटे भीगने दें। फिर छान कर इस पानी में एक ग्राम पिसी हुई हल्दी डालकर पीने से युवकों के स्वप्नदोष के रोग में अच्छी औषधि है।

38. ईसबगोल : ईसबगोल और मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच एक कप दूध के साथ सोने से 1 घंटा पहले लें और सोने से पहले पेशाब करके सोने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

39. कलौंजी : एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह, शाम खाली पेट और रात में खाने के बाद सोते समय सेवन करना चाहियें रोज कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाना चाहिए इस प्रकार 21 दिन तक प्रयोग करने से स्वप्नदोष में लाभ होगा इस रोग मे यह लेते समय नींबू का सेवन न करें।

40. इलायची : आंवले के रस में इलायची के दाने और ईसबगोल को बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

41. गोखरू : 1 चम्मच की मात्रा में गोखरू के फल का चूर्ण, थोड़ा सा घी और मिश्री मिलाकर 1 हफ्ते तक रोजाना सुबह-शाम लेने से स्वप्नदोष के रोग में लाभ होता है।

42. अनार :

अनार का पिसा हुआ छिलका पांच-पांच ग्राम सुबह-शाम पानी से लें।
अनार के छिलकों को छाया में सुखाकर कूट लें। चूर्ण बनाकर रखें। रोज 3 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

43. अपामार्ग : अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री दोनों को बराबर की मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर रख लें। एक चम्मच दिन में 3 बार 1 से 2 हफ्ते तक सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

44. अशोक : स्त्रियों के स्वप्नदोष में 20 ग्राम अशोक की छाल, कूटकर 250 मिलीलीटर पानी में पकाएं, 30 मिलीलीटर शेष रहने पर इसमें 6 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।

45. अनार : अनार के सूखे पीसे हुए छिलके की 1 चम्मच रात को सोने से पहले ठंड़े पानी के साथ फंकी के रूप में लेने से सोते समय पुरुष के शिशन से धातु के आने में लाभ मिलता है।
Thank you 

Impotency or नंपुसकता


परिचय :
जो  यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।

कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।

कारण :
नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।

लक्षण :

मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।


1. हेल्थ टिप्स :

नपुंसकता से परेशान रोगी को औषधियों खाने के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे सुबह-शाम किसी पार्क में घूमना चाहिए, खुले मैदान में, किसी नदी या झील के किनारे घूमना चाहिए, सुबह सूर्य उगने से पहले घूमना ज्यादा लाभदायक है। सुबह साफ पानी और हवा शरीर में पहुंचकर शक्ति और स्फूर्ति पैदा करती है। इससे खून भी साफ होता है।
नपुंसकता के रोगी को अपने खाने (आहार) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य-पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी जरूर खाना चाहिए। फल और फलों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलते रोगी को अश्लील वातावरण और फिल्मों से दूर रहना चाहिए क्योंकि इसका मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे बुरे सपने भी आते हैं जिसमें वीर्यस्खलन होता है।

2. ईसबगोल :

ईसबगोल की भूसी 5 ग्राम और मिश्री 5 ग्राम दोनों को रोज सुबह के समय खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे शीध्रपतन की विकृति खत्म होती है।
ईसबगोल की भूसी और बड़े गोखरू का चूर्ण 20-20 ग्राम तथा छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 ग्राम इन सबका चूर्ण बनाकर रोज 2 चम्मच गाय के दूध के साथ लें।

3. सफेद प्याज :

सफेद प्याज का रस 8 मिलीलीटर, अदरक का रस 6 मिलीलीटर और शहद 4 ग्राम, घी 3 ग्राम मिलाकर 6 हफ्ते खाने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
सफेद प्याज को कूटकर दो लीटर रस निकाल लें। इसमें 1 किलो शुद्ध शहद मिलाकर धीमी आग पर पकायें जब सिर्फ शहद ही बच कर रह जाये तो आग से अतार लें और उसमें आधा किलो सफेद मूसली का चूर्ण मिलाकर चीनी या शीशे के बर्तन में भर दें। 10 से 20 ग्राम तक दवा सुबह-शाम खाने से नामर्दी मिट जाती है।

4. जामुन : जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।

5. छुहारे :

छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है।
रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।

6. बादाम :

बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।
बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज पीयें इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

7. गाजर :

रोज गाजर का रस 200 मिलीलीटर पीने से मैथुन-शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
गाजर का हलवा रोज 100 ग्राम खाने से सेक्स की क्षमता बढ़ती है।

8. कौंच :

कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।
कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25-25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिसरी मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

9. गिलोय : गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें 5 ग्राम चूर्ण रोज मिसरी और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।

10. जायफल :

जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।
जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह-शाम शहद के साथ खायें। और इसका तेल सरसों के तेल के मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें।

11. बेल :

बेल के पत्तों का रस 20 मिलीलीटर निकालकर उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिसरी का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी खत्म होती है।
बेल के पत्तों का रस लेकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर शिश्नि पर 40 दिन तक लेप करने से नपुंसकता में लाभ होगा।

12. सफेद मूसली :

सफेद मूसली और मिसरी बराबर मिलाकर पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति वापस मिल जाती है।
सफेद मूसली 250 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें, उसे 2 लीटर दूध में मिलाकर खोया बना लें। फिर 250 ग्राम घी में डालकर इस खोए को भून लें। ठंडा हो जाने पर आधा किलो पीसकर शक्कर (चीनी) मिलाकर पलेट या थाली में जमा लें। सुबह-शाम 20 ग्राम खाने से काम-शक्ति बढ़ती है।
सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50-50 ग्राम कूट छान कर 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिलीलीटर कम गर्म दूध में खांड़ के संग मिलाकर लें।
सफेद मूसली 20 ग्राम, ताल मखाने के बीज 200 ग्राम और गोखरू 200 ग्राम। तीनों को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें, फिर इसमें से 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खायें।
सफेद मूसली और मिसरी बराबर मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से और ऊपर से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।

13. चना : भीगे चने सुबह-शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से मैथुन-शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता खत्म होती है।

14. शतावर :

शतावर को दूध में देर तक उबालकर मिसरी मिलालें और उस दूध को पीने से ही कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) खत्म हो जाती है।
शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम शक्कर को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।
शतावर और असगन्ध के 4 ग्राम चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में सुबह-शाम डालकर पीयें इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीर की कमजोरी भी दूर होती है।

15. सेमल :

सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिलीलीटर रस में मिसरी मिलाकर पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।
10-10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिलीलीटर पानी के साथ घोट कर सुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

16. बड़ी गोखरू :

बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह-शाम लेने से कामशक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
बड़ा गोखरू और काले तिल इन दोनों को 14 ग्राम की मात्रा में कूट-पीस लें फिर इस को 1 किलो गाय के दूध में पकाकर खोआ बना लें। यह एक मात्रा है। इस खोयें को खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर गाय के निकाले दूध के साथ पी लें 40 दिन तक इसको खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
25 ग्राम बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण, 250 मिलीलीटर उबले पानी में डालकर रखें। इसमें से थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण 2 ग्राम को चीनी और घी के साथ सेवन करें तथा ऊपर से मिश्री मिले दूध का सेवन करने से कामोत्तेजना बढ़ती है।

17. गोखरू :

हस्तमैथुन की बुरी लत से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए 1-1 चम्मच गोखरू के फल का चूर्ण और काले तिल को मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करें इससे नपुंसकता में लाभ होता है।
गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली, सफेद सेमर की कोमल जड़, आंवला, गिलोय का सत और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम से लगभग 20 ग्राम तक चूर्ण दूध के साथ खाने से नपुंसकता और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।
गोखरू को 3 बार दूध में उबालकर तीनों बार सुखाकर चूर्ण बनाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।
गोखरू का चूर्ण और तिल बराबर मिलाकर बकरी के दूध में पकाकर शहद में मिला लें और खायें इससे अनेक प्रकार की नपुंसकता खत्म होती है।
देशी गोखरू 150 ग्राम पीसकर छान लें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-शाम शहद में मिलाकर चाटने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ मिलता है।
गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरेंटी तथा गंगरेन इन सबको 100 ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में रात के समय फांककर ऊपर से गरम दूध पियें। 60 दिनों तक रोज खाने से वीर्य बढ़ता है और नपुंसकता दूर होती है।

18. विदारीकन्द :

विदारीकन्द के चूर्ण को घी, दूध और गूलर के रस के साथ खाने से प्रौढ़ पुरुष भी नवयुवकों की तरह मैथुन-शक्ति प्राप्त कर सकता है।
5 ग्राम विदारीकन्द को पीसकर लुगदी बना लें। इसे खाकर ऊपर से 5 ग्राम देशी घी और मिश्री मिलाकर दूध के साथ पियें। यह बल और वीर्य को बढ़ाता है तथा इससे नपुंसकता दूर होती है।

19. सूखे सिंघाड़े : सूखे सिंघाड़े को कूट-पीसकर घी और चीनी के साथ हलवा बनाकर खाने से कुछ ही हफ्ते में नपुंसकता खत्म हो जाती है।

20. तरबूज : तरबूज के बीजों की गिरी 6 ग्राम, मिश्री 6 ग्राम मिलाकर, चबाकर खाने से और ऊपर से दूध पीने से शरीर में शक्ति विकसित होने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।

21. गेंदे के बीज : गेंदे के बीज 4 ग्राम और मिश्री 4 ग्राम को पीसकर कुछ दिनों तक खाने से वीर्य स्तंभन शक्ति का विकास होता है। इससे पुरुष कुछ देर तक मैथुन कर सकता है।

22. कैथ : कैथ के सूखे पत्तों का चूर्ण 6 ग्राम रोज खाकर ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध पीने से धातु (वीर्य) बढ़ता है।

23. उड़द :

उड़द की दाल 40 ग्राम को पीसकर शहद और घी में मिलाकर खाने से पुरुष कुछ दिनों में ही मैथुन (संभोग) करने के लायक बन जाता है।
उड़द की दाल के थोड़े-से लड्डू बना लें। उसमें से 2-2 लड्डू खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुसकता दूर होती है।

24. इमली : इमली के बीजों को भून लें, फिर उनके छिलके अलग करके, उनका चूर्ण बनाकर रोज 3 ग्राम चूर्ण मिश्री के साथ खाने से वीर्य शक्ति बढ़ने लगती है और नपुंसकता दूर हो जाती है।

25. तुलसी :

तुलसी की जड़ और जमीकन्द को पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।
धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज 1 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
तुलसी की मंजरी या जड़ के 1 से 3 ग्राम बारीक चूर्ण में गुड़ मिलाकर ताजे दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है।

26. गंधक : गंधक और शहद को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को शिश्न (लिंग) पर लेप करें। इससे वीर्य स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।

27. काली मूसली :

काली मूसली का पाक बनाकर खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
काली मूसली 10 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
काली मूसली की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम मिश्री मिले हल्के गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में कुछ हद तक लाभ होता है।

28. काले तिल : काले तिल, सोंठ, पीपल, मिर्च, भारंगी और गुड़ समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़े को 21 दिनों तक पीने से शरीर की गर्मी बढ़ती है।

29. जावित्री : जावित्री डेढ़ ग्राम, जायफल 10 ग्राम, बड़ी इलायची 10 ग्राम और अफीम आधा ग्राम को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर सर्दियों में लगभग एक महीने तक खाने से नपुंसकता मिट जाती है।

30. ग्वारपाठा : ग्वारपाठे का गूदा और गेहूं का आटा बराबर मात्रा में लेकर घी मिला लें फिर इसके दुगुने वजन के बराबर शक्कर (चीनी) लेकर हलुआ बनाकर खाने से 7 दिन में नपुंसकता दूर होती है।

31. गुलाबजल : 3 बोतल गुलाबजल में 10 ग्राम सोने का बुरादा डालकर कूटकर मिला लें जब सब गुलाबजल उसमें समा जायें, तब निकालकर रख लें। लगभग आधा ग्राम मलाई में मिलाकर खाने से सहवास करने से जल्दी ही वीर्य पतन नहीं होता है।

32. अगर का चोया : अगर का चोया, पान में मिलाकर खाने से नामर्दी में लाभ होता है।

33. घी : सहवास से 1 घण्टा पहले शिश्न पर लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग घी की मालिश करने से नपुंसकता नहीं रहती है।

34. मालकांगनी : मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।

नोट : औषधि खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।

मांलकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।
मालकांगनी के दाने 50 ग्राम और 25 ग्राम शक्कर (शुगर) को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जायें तब उतारकर मोटी-मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के दूध के साथ खायें। इससे नपुंसकता दूर होती है।

35. बड़ी कटेरी : बड़ी कटेरी की 25 ग्राम ताजी जड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर पीने से नपुंसकता मिट जाती है।

नोट : खटाई और बादीयुक्त समान न खायें।

36. कलौंजी : कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नामर्दी मिट जाती है।

37. जदवार : जदवार 2 ग्राम खाने से काम-शक्ति (संभोग) बढ़ती है।

38. जवासीद : जवासीद की गोंद को अकरकरा के साथ पीसकर तिल के तेल में मिलाकर लिंग पर लेप करने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।

39. धतूरा : धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग बराबर मात्रा में पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाकर रोज सुबह-शाम 1-1 गोली का सेवन करें।

40. बहेड़े : बहेड़े का चूर्ण 6 ग्राम, 6 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रोज खाने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर हो जाती है।

41. महुआ : महुए के 25 ग्राम फूलों को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर पीने से कमजोरी की नपुंसकता (नामर्दी) मिट जाती है।

42. सेमर : सेमर की छोटी जड़ों को छाया में सुखाकर पका दें। पकाने के बाद इसकी जड़ों को खाने से नपुसंकता (नामर्दी) दूर होती है।

43. सुहागा : सुहागा, कूट और मैनसिल को बराबर मिलाकर चूर्ण बनाकर चमेली के रस और तिल के तेल में पकाकर लिंग पर मलें। इससे लिंग का टेढ़ापन दूर होता है।

44. गोरखमुण्डी :

गोरखमुण्डी 75 ग्राम कूट छानकर इसमें 75 ग्राम खांड़ मिला लें 10 ग्राम दवा सोते समय कर्म गर्म खांड़ मिले दूध के साथ लें।
गोरखमुण्डी के फूलों के चूर्ण को नीम के रस के साथ लेने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ होता है।

45. कुलिंजन : लगभग 2 ग्राम कुलिंजन के चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर खाने से और ऊपर से गाय के दूध में शहद को मिलाकर पीने से काम-शक्ति बढ़ती है।

46. असगन्ध : 10 ग्राम असगन्ध नागौरी के बारीक चूर्ण को गाय के 500 मिलीलीटर दूध में उबालें। जब 400 मिलीलीटर दूध रह जाये, तब उसमें शहद मिलाकर 40 दिन तक पियें इससे काम-शक्ति बढ़ती है।

47. दालचीनी : दालचीनी 75 ग्राम कूटकर छान लें 5 ग्राम को पानी में पीसकर सोते समय लिंग पर सुपारी (लिंग का अगला हिस्से) को छोड़कर लेप करें और 2-2 ग्राम को सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।

48. सीम्बल : सीम्बल की जड़ 100 ग्राम कूट छानकर 5-5 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम प्रयोग करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।

49. मल्ल सिंदूर : मल्ल सिंदूर एक ग्राम का चौथा भाग, शहद और अदरक के रस को सुबह-शाम लें। इससे हस्तमैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।

50. हल्दी : हल्दी और कपूर 10-10 ग्राम पीस लें, फिर 5 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह-शाम दूध के साथ लेना चाहिए।

51. चनसूर : चनसूर 10 ग्राम को दूध में उबालकर मिश्री के साथ सुबह-शाम खायें। इससे संभोग की शक्ति बढ़ जाती है।

52. कुलिजंन : कुलिजंन को मुंह में रखकर चूसते रहने से भी कामशक्ति में वृद्धि होती है।

53. उशवा : जंगली उशवा के चूर्ण में 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर रोज 1 मात्रा पीते रहने से नपुंसकता दूर होती है।

54. छोटी माई : छोटी माई की दाल का चूर्ण 5 ग्राम से 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर तैयार कर रोज 2 बार सेवन करने से लाभ होता है।

55. पटुओक (सन) : पटुओक (सन) के बीज का तेल खाने कें काम में आता है। जिससे शरीर हष्ट पुष्ट होता है, कामोत्तेजना बढ़ती है। इस तेल की मालिश से चोट मोच का दर्द भी जल्दी ठीक होता है।

56. लहसुन :

नपुंसकता और कामशक्ति में कमजोरी आने पर 60 ग्राम लहसुन की कली को घी में तलकर रोजाना खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
लहसुन की एक पुतिया घी में भूनकर शहद मे साथ खाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
रोज लगभग 20 दिन तक 4-5 लहसुन की कलियां दूध के साथ खाने से नपुंसकता में लाभ होता है।

57. प्याज :

प्याज के रस में घी और शहद मिला कर खाने से नपुंसकता दूर होती है। प्याज का रस 10 से 20 मिलीलीटर रोज सुबह-शाम लें।
प्याज के हिस्से का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम प्रयोग करने से कामोत्तेजना की वृद्धि होती है।

58. जबाद कस्तूरी : जबादकस्तूरी शिश्न यानी लिंग पर लेप करने से संभोग करने में ज्यादा आनन्द मिलता है। मगर इससे गर्भधारण नहीं होता है।



59. अगर : अगर का पुराना सेंट 1 से 2 बूंद को पान में डालकर खाने से बाजीकरण होता है। और नपुंसकता दूर होती है।

60. छोटी इलायची : बाजीकरण के लियें छोटी इलायची का चूर्ण लगभग आधे से दो ग्राम तक सुबह-शाम खायें या मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध के साथ रोज रात को सोने से पहले खायें।

61. केवटी मोथा : केवटी मोथा के बीज 10 ग्राम पीसकर, मिश्री मिले गर्म गाय के दूध के साथ रोज शाम को पीने से नपुंसकता दूर हो जाती है।

62. फरहद : सफेद फूल वाले फरहद की जड़ पीसकर 5 से 10 ग्राम को ठंडे दूध के साथ सुबह शाम पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।

63. सहजना (मुनगा) : सहजना के फूलों को दूध में उबाल कर रोज रात को मिश्री मिलाकर पीने से नपुंसकता की बीमारी दूर होकर लाभ होता है।

64. गुंजा (करजनी) : गुंजा (करजनी) की जड़ 2 ग्राम दूध में पकाकर भोजन से पहले रोज रात में खाने से पूरा लाभ होता है। वीर्य सम्बन्धी समस्त दोष दूर होते हैं।

65. केवांच (कपिकच्छू) : केवांच (कपिकच्छू) के बीजों के बीच का हिस्सा का चूर्ण 2 से 6 ग्राम रोज रात को सोते समय मिश्री मिले गर्म दूध के साथ पीने से लाभदायक होता है।

66. अतिबला : अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह शाम मिश्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में पूरा लाभ होता है।

67. पटेरा : पटेरा (एरफा) के फूल 3 से 6 ग्राम को घोंटकर पीसकर सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से वीर्य बढ़ता है।

68. जमालगोटा : जमालगोटा के तेल को लिंग के ऊपर लगाने से लाभ मिलता है।

69. तालमखाना : नपुंसकता को दूर करने के लियें तालमखाना के बीज का चूर्ण, 2 से 4 ग्राम केवाचं के बीज के साथ मिश्री मिले ताजे निकाले दूध के साथ सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

70. भंगरैया : भंगरैया के बीज मिश्री मिले गर्म दूध में डालकर दूध सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।

71. मधुरसा : मधुरसा की जड़ का रस 5 ग्राम से 10 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ खाने से शरीर मजबूत बनाता है और कामोत्तेजना भी बढ़ती है।

72. विष्णुकान्ता : विष्णुकान्ता का रस 20 से 40 मिलीलीटर या काढ़ा 40 से 80 मिलीलीटर तक सुबह-शाम खाने से पूयमेह, शुक्र मेह, दौर्बल्यता (कमजोरी) आदि कष्ट दूर हो जाते है।

73. वनतुलसी : वनतुलसी के बीज 3 से 7 ग्राम लेकर मिश्री मिले गाय के दूध से लेने से लाभ होता है।

74. बड़ (बरगद) :

बड़ (बरगद) का दूध 20 से 30 बूंद रोज सवेरे बताशे या चीनी पर डालकर खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।
नपुंसकता दूर करने के लिए बताशे में दूध की 5-10 बूंदें सुबह-शाम रोज खाने से लाभ होता हैं।
बरगद के पेड़ की कोंपले और गूलर के पेड़ की छाल 3-3 ग्राम और मिश्री 6 ग्राम इन सबको पीसकर लुगदी सी बना लें और 3 बार मुंह में रखकर खालें और ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म शक्ति बढ़ती है।

75. सिरस :

सिरिस के फूलों का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होगा और इससे शीघ्रपतन में भी लाभ होगा।
सिरिस के बीज का चूर्ण 1 से 2 ग्राम को मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम लेन से वीर्य गाढ़ा होता है।
सिरिस की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम घी में शक्कर मिलाकर गर्म दूध के साथ 2 बार खायें अगर फूलों का रस, बीज का चूर्ण और छाल का चूर्ण एक साथ मिश्री मिले दूध के साथ खाया जायें तो शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।
सिरस के थोड़े से बीज सुखाकर पीस लें। इसमें 3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

76. मुनक्का : नपुंसक व्यक्ति को मुनक्का खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।

77. ज्वार : ज्वार को अपने खाने के रूप में लेने से नपुंसकता दूर होती है।

78. कलम्बी : कलम्बी का साग रोज खाने से वीर्य बढ़ता है।

79. चौपतिया साग : चौपतिया साग नपुंसकों के लियें फायदेमन्द है। क्योंकि इसमें वीर्य को बढ़ाने का गुण होता है।

80. भूईछत्ता : भूईछत्ता को शक्कर (शुगर) मिले दूध में बराबर रूप से उबाल कर खाने से कामशक्ति और शारीरिक शक्ति दोनों बढ़ती है।

81. रोहू मछली : रोहू मछली वीर्यवर्द्धक होता है। इसलियें नपुंसकों के लियें अनुकूल खाद्य है। हिलसा मछली भी रोहू की तरह वीर्य वर्धक होती है।

82. अंबर : नपुंसकता में अंबर आधा से एक ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

83. उटंगन : उटंगन के बीज, जो चपटे और रोमाच्छादित होते हैं, पानी में भिगोनें पर काफी लुआबदार हो जाते हैं, इनको शतावरी, कौचबीच चूर्ण आदि के साथ सुबह शाम मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध के साथ सेवन करने से काफी लाभ होता है।

84. बहमन सफेद- बहमन सफेद या बहमन सुर्ख की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह और शाम मिसरी को मिलाकर गर्म-गर्म दूध के खाने से कामोद्दीपन होता है।

85. ब्रहमदण्डी : ब्रहमदण्डी का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम शहद के साथ सुबह-शाम खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।

86. सालव मिश्री : सालव मिश्री का कनद चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।

87. हरमल : हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम मिश्री को मिलाकर गर्म-गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।

88. आम :

आम की मंजरी 5 ग्राम की मात्रा में सुखाकर दूध के साथ लेने से काम-शक्ति बढ़ती है।
2-3 महीने आम का रस पीने से ताकत आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है। और शरीर मोटा होता है। इससे वात संस्थान (नर्वस सिस्टम) भी ठीक हो जाता है।

89. अनार : रोज मीठे अनार के 100 ग्राम दानों को दोपहर के समय खाने से संभोग शक्ति बढ़ाती है।

90. पिप्पली : पिप्पली, उड़द, लाल-चावल, जौ, गेहूं। सब को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर आटा पीसकर फिर इसको देशी घी में पूरिया बनाकर रोज 3 पूरिया 40 दिन तक खायें। ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर हो जाती है।

91. आंवला : आंवलों का रस निकाल कर एक चम्मच आंवले के चूर्ण में मिलाकर लें। उसमें थोड़ी-सी शक्कर (चीनी) और शहद मिलाकर घी के साथ सुबह-शाम खायें।

92. अरण्ड : अरण्ड के बीज 5 ग्राम, पुराना गुड़ 10 ग्राम, तिल 5 ग्राम, बिनौले की गिरी 5 ग्राम, कूट 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, जावित्री 2 ग्राम तथा अकरकरा 2 ग्राम। इन सबको कूट-पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर पोटली बना लें और इस पोटली को बकरी के दूध में उबालें। दूध जब अच्छी तरह पक जायें, तो इसे ठंड़ा करके 5 दिन तक पियें तथा पोटली से शिश्नि की सिंकाई करें।

93. मुलेठी : मुलेठी, विदारीकन्द, तज, लौग, गोखरू, गिलोय और मूसली। सब चीजे 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 40 दिन तक सेवन करें।

94. नागौरी असगंध : नागौरी असगंध और विधारा। दोनों 250-250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच चूर्ण देसी घी या शहद के साथ लें।

95. सालम मिसरी : सालम मिसरी, तोदरी सफेद, कौंच के बीजों की मींगी, ताल मखाना, सखाली के बीज, सफेद व काली मूसली, शतावर तथा बहमन लाल। इन सबका 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीस लें और चूर्ण बना लें 2 चम्मच रोज दूध से 40 दिन तक बराबर खाने से पूरा लाभ होता है।

96. नारियल : नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।

97. चिलगोजे : 15 चिलगोजे रोज खाने से नपुंसकता दूर होती है।

98. शहद : शहद और दूध को मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। शरीर बलवान होता है।

99. गेहूं : अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खायें। स्वाद के लियें गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते है। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।

100. पिस्ता : पिस्ता में विटामिन `ई´ बहुत होता है। विटामिन `ई´ से वीर्य बढ़ता है।

101. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।

102. आक : किसी कपड़े को आक के दूध में चौबीस घंटे तक भिगोकर रखा रहने दें, उसके बाद निकालकर सुखा लें। फिर उस पर घी लपेट कर 2 बत्तियां बना लें और उसको लोहे की सलाई पर रखे नीचे एक कांसे की थाली रख दे और बत्तियां जला दें जो तेल नीचे थाली पर गिरेगा उसे लिंग पर सुपारी छोड़ कर पूरे पर मलते रह आधा घंटे तक उसके बाद एरण्ड का पत्ता लपेट कर ऊपर से कच्चा धागा बांध दें इससे हस्तमैथुन का दोष दूर हो जाता है।

103. लौंग : लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी लगभग आधा ग्राम इनको कूट-पीसकर शहद में मिलाकर आधे-आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1 गोली बंगला पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाये तो खटाई खाले स्खलन हो जायेगा।

104. चमेली : चमेली के पत्तों का रस तिल के तेल की बराबर की मात्रा में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी उड़ जाए और केवल तेल शेष रह जाए तो इस तेल की मालिश शिश्न पर सुबह-शाम प्रतिदिन करना चाहिए। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।

105. ढाक : ढाक की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।

106. हींग : हींग को शहद के साथ पीसकर शिश्न या लिंग पर लेप करने से वीर्य ज्यादा देर तक रुकता है और संभोग करने में आंनद मिलता है।

107. मालकांगनी : मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर रात में शिशन (लिंग) पर लपेटकर सो जाऐं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता हैं।

108. आक :

छुआरों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, फिर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर मटर जैसी गोलियां बना लें, रात्रि के समय 1-2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है।
आक की छाया में सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्ण को 500 मिलीलीटर दूध में उबालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामर्दी दूर होती है।
आक का दूध असली मधु और गाय का घी, समभाग 4-5 घंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्द्री की सीवन और सुपारी को बचाकर इसकी धीरे-धीरे मालिश करें और ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता बांध दें, इस प्रकार सात दिन मालिश करें। फिर 15 दिन छोड़कर पुन: मालिश करने से शिश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।

109. मुलहठी : मुलहठी का पीसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है।

110. जटामांसी - जटामांसी, सोठ, जायफल और लौंग। सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खायें।

111. काकड़ासिंगी : आधा चम्मच काकड़ासिंगी कोष का बारीक चूर्ण एक कप दूध के साथ सुबह-शाम सेवन कराते रहने से कुछ हफ्ते में नपुंसकता में पूरा लाभ मिलेगा।

112. कलौजी : कलौंजी के तेल को शिश्न व कमर पर नियमित रूप से सुबह-शाम कुछ हफ्तों तक मालिश करते रहने से यह रोग दूर हो जायेगा।

113. कनेर - सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकायें। फिर ठंड़ा करके जमने पर इसे शिश्न पर सुबह-शाम लगाने से नपुंसकता में आराम मिलता है।

114. पान-

रोगी के लिंग पर पान के पते बांधने से और पान के पतें पर मालकांगनी का तेल 10 बूंद लगाकर दिन में 2 से 3 बार कुछ दिन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के दौरान दूध, घी का अधिक मात्रा में सेवन जारी रखें।
ध्वज भंग रोग में पान को चबाने से और रोगी के लिंग पर बांधने से लाभ होता है।

115. कपूर - घी में कपूर को घिसकर शिशन (पेनिस) के ऊपर मालिश करें। प्रयोग रोज कुछ हफ्ते तक करें।

116. अजवाइन : तीन ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस 10 मिलीलीटर में तीन बार 10-10 ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करें। 21 दिन में पूर्ण लाभ होता है। इस प्रयोग से नपुंसकता, शीघ्रपतन व शुक्राणु अल्पता के रोग में भी लाभ होता है।

117. अकरकरा :

अकरकरा का बारीक चूर्ण शहद में मिलाकर शिश्न पर लेप करके रोजाना पान के पत्ते से लपेट रखने से शैथिल्यता दूर होकर वीर्य बढेगा।
अकरकरा 2 ग्राम, जंगली प्याज 10 ग्राम इन दोनों को पीसकर लिंग पर मलने से इन्द्री कठोर हो जाती है। 11 या 21 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए।

118. सरसों का तेल- नपुंसकता दूर करने के लिए कटुपर्णी की एक ग्राम छाल तथा बरगद का दूध दोनों को गर्म कर चने के बराबर गोलियां बनाकर चौदह दिन तक पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।

119. कुचला –

शोधित कुचला लगभग एक चौथाई से आधे ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध के साथ पीने से हस्तमैथुन या ज्यादा मैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।

120 कुलंजन -एक कप दूध मे एक चम्मच कुलंजन के चूर्ण को मिलाकर सुबह शाम पिया जायें तो नपुंसकता दूर होती है।

121. तिल :

तिल और गोखरू दूध में उबालकर पीने से धातु स्राव बन्द हो जाता है और नामर्दी दूर हो जाती है।
तिल और अलसी का 100 मिलीलीटर काढ़ा सुबह और शाम भोजन से पहले पिलाने से मर्दाना ताकत बढ़ती है।
तिल का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम रोजाना 2 बार खाने से पुरुषत्व (सहवास) शक्ति की बढ़ती है।

122. अश्वगंधा :

अश्वगंधा का कपड़े से छना चूर्ण और खांड़ को बराबर मात्रा मे मिलाकर रखें, इसको एक चम्मच गाय के ताजे दूध के साथ सुबह भोजन से 3 घण्टे पहले चुटकी-चुटकी चूर्ण खायें और ऊपर से दूध पीते रहे। रात के समय इसके बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह घोंटकर लगाने से इन्द्रिय की शिथिलता दूर होकर कठोर और दृढ़ हो जाती है।
अश्वगंधा, दालचीनी और कडुवा कूठ समभाग कूटकर छान लें और गाय के मक्खन में मिलाकर 5-10 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम सुपारी छोड़ शेष लिंग पर मलें, इसको मलने के पहले और बाद में लिंग को गरम पानी से धो लें।
असगंध के चूर्ण में शहद, घी और मिसरी को मिलाकर सुबह के समय खाने से कुछ महीनो में ही नपुंसकता (नामर्दी) खत्म हो जाती है।

लौंग or Cloves

परिचय : लौंग का अधिक मात्रा में उत्पादन जंजीबार और मलाक्का द्वीप में होता है। लौंग के पेड़ बहुत बड़े होते हैं। इसके पेड़ को लगाने के आठ या नौ वर्ष के बाद ही फल देते है। इसका रंग काला होता है। यह एक खुशबूदार मसाला है। जिसे भोजन में स्वाद के लिए डाला जाता है। लौंग दो प्रकार की होती है। एक तेज सुगन्ध वाली दूसरी नीले रंग की जिसका तेल मशीनों के द्वारा निकाला जाता है जो लौंग सुगन्ध में तेज, स्वाद में तीखी हो और दबाने में तेल का आभास हो उसी लौंग का अच्छा मानना चाहिए। लौंग का तेल पानी की तुलना में भारी होता है। इसका रंग लाल होता है। सिगरेट की तम्बाकू को सुगन्धित बनाने के लिए लौंग के तेल का उपयोग होता है। लौंग के तेल को औषधि के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। इसके तेल को त्वचा पर लगाने से त्वचा के कीड़े नष्ट होते हैं।
हानिकारक : ज्यादा लौंग खाने से गुर्दे और आंतों को नुकसान पहुंच सकता है। दोषों को दूर करने वाला : बबूल का गोंद, लौंग में व्याप्त दोषों को दूर करता है। मात्रा : 1 ग्राम से 3 ग्राम तक। गुण : आयुर्वेदिक मतानुसार लौंग तीखा, लघु, आंखों के लिए लाभकारी, शीतल, पाचनशक्तिवर्द्धक, पाचक और रुचिकारक होता है। यह प्यास, हिचकी, खांसी, रक्तविकार, टी.बी आदि रोगों को दूर करती है। लौंग का उपयोग मुंह से लार का अधिक आना, दर्द और विभिन्न रोगों में किया जाता है। यह दांतों के दर्द में भी लाभकारी है। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार : लौंग खुश्क, उत्तेजक और गर्म है। इसको खाने से सिर दर्द होता है। यह पाचनशक्ति को बढ़ाता है। दांतों और मसूढ़ों को मजबूत बनाता है। इसको पीसकर मालिश करने से जहर दूर होता है। वैज्ञानिक मतानुसार : लौंग गर्म होता है। यह पेट के दर्द को मिटाने वाला माना जाता है। गर्भवती स्त्रियों को उल्टी होने पर लौंग को गर्म पानी में भिगोकर उसका पानी पिलाने से लाभ होता है। इसके तेल की मालिश का असर सामान्य कपूर के तेल के समान होता है। इसका आसव बनाकर उसमें से सुगन्धित पदार्थ तैयार किये जाते हैं। कोको, चाकलेट, आइसक्रीम आदि खाद्य-पदार्थों में पाया जाने वाला बनावटी वेनीला एसेन्स लौंग से ही तैयार किया जाता है। लौंग की पहचान : व्यापारी लौंग में तेल निकाला हुआ लौंग मिला देते है। अगर लौंग में झुर्रिया पड़ी हो तो समझे कि यह तेल निकाली हुई लौंग है।



विभिन्न रोगों में सहायक
1. बेहोशी: लौंग घिसकर अंजन करने से बेहोशी दूर होती है। लौंग को घी या दूध में पीसकर आंखों में लगाने से हिस्टीरिया की बेहोशी दूर हो जाती है। 2. जुकाम: लौंग का काढ़ा पीने से जुकाम ठीक हो जाता है। 2 बूंद लौंग के तेल की लेकर 25-30 ग्राम शक्कर में मिलाकर सेवन करने से जुकाम समाप्त हो जाता है। लौंग के तेल को रूमाल पर डालकर सूंघने से जुकाम मिटता है। 100 मिलीलीटर पानी में 3 लौंग डालकर उबाल लें। उबलने पर जब पानी आधा बाकी रह जाये तो इसके अन्दर थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से जुकाम दूर हो जाता है। पान में 2 लौंग डालकर खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। 3. रतौंधी: 1 लौंग को बकरी के दूध के साथ पीसकर सुरमे की तरह आंखों में लगाने से धीरे-धीरे लगाने से रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है। 4. बुखार: 1 लौंग पीसकर गर्म पानी से फंकी लें। इस तरह रोज 3 बार यह प्रयोग करने से सामान्य बुखार दूर होता है। 5. आंख पर दाने का निकलना: आंखों में दाने निकल जाने पर लौंग को घिसकर लगाने से वह बैठ जाती है। 6. दांतों के रोग: दांत में कीड़े लगने पर लौंग को दांत के खोखले स्थान में रखने से या लौंग का तेल लगाने से लाभ मिलता है। रूई को लौंग के तेल में भिगोकर दर्द वाले दांत के नीचे रखें तथा लार को नीचे गिरने दें। लौंग को आग पर भूनकर दांतों के गड्ढे में रखने से दांतों का दर्द खत्म होता है। लौंग के तेल में कपूर का चूर्ण मिलाकर दर्द वाले दांतों पर लगाने से दर्द में आराम रहता है। 5 लौंग पीसकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर दांतों पर मलने से दांतों के दर्द में लाभ होता है अथवा 5 लौंग 1 गिलास पानी में उबालकर इससे रोजाना 3 बार कुल्ला करने से लाभ होता है। 7. प्रमेह: लौंग, जायफल और पीपल को 5 ग्राम लेकर 20 ग्राम कालीमिर्च और 160 ग्राम सोंठ मिलाकर पाउडर बना लें। बाद में पाउडर में उसी के बराबर शक्कर डालकर खायें। इससे खांसी, बुखार, भूख का न लगना, प्रमेह, सांस रोग और ज्यादा दस्त का आना खत्म होता है। 8. सूखी या गीली खांसी: सुबह-शाम दो-तीन लौंग मुंह में रखकर रस चूसते रहना चाहिए। लौंग या विभीतक फल मज्जा को घी में तलकर रख लेना चाहिए। इसे खांसी आने पर चूसना चाहिए इससे सूखी खांसी में लाभ होता है। लौंग और अनार के छिलके को बराबर पीस लें, फिर इसे चौथाई चम्मच भर लेकर आधे चम्मच शहद के साथ दिन में 3 बार चाटें। इससे खांसी ठीक हो जाती है। 9. भूख न लगना: आधा ग्राम लौंग का चूर्ण 1 ग्राम शहद के साथ रोज सुबह चाटना चाहिए। थोडे़ ही दिनों में भूख अच्छी तरह लगने लगती है।

10. गर्भवती स्त्री की उल्टी: गर्भवती स्त्रियों की उल्टी पर 1 ग्राम लौंग का पाउडर अनार के रस के साथ देना चाहिए। गर्भवती की मिचली में लौंग का चूर्ण शहद के साथ बार-बार चाटने से जी मिचलाना, उल्टी आदि सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसे प्रतिदिन 120 ग्राम से 240 ग्राम की मात्रा में दो बार चाटना चाहिए। लौंग एक ग्राम पीसकर शहद में मिलाकर दिन में 3 बार चटाने से गर्भवती की उल्टी बंद हो जाती है। 11. बुखार में खूब प्यास लगना: थोड़े से पानी में चार लौंग डालकर पानी को उबालें, जब आधा शेष बचे तो इसे बार-बार पीने से बुखार दूर होता है। 12. पेट दर्द और सफेद दस्त: लौंग के पाउडर को शहद के साथ चाटने से लाभ मिलता है। 13. जीभ कटने पर: पान खाने से अगर जीभ कट गई हो तो एक लौंग को मुंह में रखने से जीभ ठीक हो जाती है। 14. सिर दर्द: लौंग को पीसकर लेप करने से सिरदर्द तुरन्त बंद हो जाता है। इसका तेल भी लगाया जाता है या 5 लौंग पीसकर 1 कप पानी में मिलाकर गर्म करें जब आधा बच जाये तो उसे छानकर चीनी मिलाकर पिलायें। इसका सेवन शाम को और सोते समय 2 बार करते रहने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। 6 ग्राम लौंग को पानी में पीसकर गर्मकर गाढ़ा लेप कनपटियों पर लेप करने से सिर का दर्द दूर होता है। लौंग के तेल को सिर और माथे पर लगायें या नाक के दोनों ओर के नथुनों में डालें। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है। 2 से 3 लौंग के साथ लगभग 480 मिलीग्राम अफीम को जल में पीसकर गर्म करके सिर पर लेप करने से हवा और सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर हो जाता है। 1 या 2 ग्राम लौंग और दालचीनी को मैनफल के गूदे के साथ देने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। इसको अधिक मात्रा में सिर दर्द के रोगी को नहीं देना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में लेने से रोगी को उल्टी हो सकती है। लगभग 5 लौंग लेकर उसको एक कप पानी में पीसकर गर्म करें और आधा कप पानी रहने पर छानकर चीनी मिला दें। इसे सुबह और शाम को दो-चार बार पिलाने से सिर का दर्द खत्म हो जाता है। 15. पेट की गैस: 2 लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डालें। फिर कुछ ठंडा होने पर पी लें। इस प्रकार यह प्रयोग रोजाना 3 बार करने से पेट की गैस में फायदा मिलेगा। आधे कप पानी में 2 लौंग डालकर पानी में उबाल लें। फिर ठंडा करके पीने से लाभ होगा। 16. अम्लपित्त: अम्लपित्त से पाचनशक्ति खराब रहती है। बूढ़े होने से पहले दांत भी गिरने लगते हैं। आंखे दुखने लगती हैं और बार-बार जुकाम लगा रहता है। इस प्रकार अम्लपित्त से अनेक रोग पैदा होते हैं। अम्लपित्त के रोगी को चाय काफी नुकसानदायक होती है। इस अवस्था में खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह-शाम खाने से या शर्बत में लेने से अम्लपित्त से पैदा होने वाले सारे रोगों में फायदा होता है और अम्लपित्त ठीक हो जाता है अथवा 15 ग्राम हरे आंवलों का रस 5 पिसी हुई लौंग, 1-1 चम्मच शहद और चीनी मिलाकर रोगी को सेवन करायें। ऐसे रोज सुबह, दोपहर और शाम को 3 बार खाने से कुछ ही दिनों में फायदा होता है। सुबह और शाम भोजन के बाद 1-1 लौंग खाने से आराम आता है। लौंग को खाना खाने के बाद गोली के रूप में चूसने से पेट की अम्लपित्त की शिकायत समाप्त होती है। 17. नासूर: लौंग और हल्दी पीसकर लगाने से नासूर के रोगी का रोग दूर हो जाता है। 18. हैजा: लौंग का पानी बनाकर रोगी को देने से प्यास और उल्टी कम होती है और पेशाब भी खुलकर आता है। लौग के तेल की 2-3 बूंदे चीनी या बताशे में देने से हैजा की उल्टी और दस्तों में लाभ होता है। इसके तेल के सेवन करने से पेट की पीड़ा, अफरा, वायु और उल्टी दूर होती है। 19. पित्तज्वर: 4 लौंग पीसकर पानी में घोलकर रोगी को पिलाने से तेज ज्वर कम होता है।

20. आन्त्रज्वर (टायफाइड): इसमें लौंग का पानी पिलाना फायदेमंद है। 5 लौंग 2 किलो पानी में उबालकर आधा पानी शेष रहने पर छान लें। इस पानी को रोगी को रोज बार-बार पिलायें। सिर्फ पानी भी उबालकर ठंडा करके पिलाना फायदेमंद है। 22. सर्दी लगना: लौंग का काढ़ा बनाकर खाने से या लौंग के तेल की 2 बूंद चीनी में डालकर खाने से सर्दी खत्म होती है। 23. मुंह की बदबू: लौंग को मुंह में रखने से मुंह और सांस की बदबू दूर होती है। 24. दिल की जलन: 2-4 पीस लौंग को ठंडे पानी में पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से दिल की जलन शांत होती है। 25. जी मिचलाना: 2 लौंग पीसकर आधा कप पानी में मिलाकर गर्म करके पिलाने से जी मिचलाना ठीक हो जाता है। लौंग चबाने से भी जी मिचलाना ठीक हो जाता है। 26. दांतों का दर्द: 5 ग्राम नींबू के रस में 3 लौंग को पीसकर मिला लें। इसे दांतों पर मलें और खोखल में लगायें। इससे दांतों का दर्द नष्ट होता है। लौंग के तेल में रूई भिगोकर दांतों में लगाने तथा खोखल में रखने से दांतों का दर्द ठीक होता है। 27. दमा या श्वास रोग: दो लौंग को 150 मिलीलीटर पानी में उबालें और इस पानी को थोड़ी सी मात्रा में पीने से अस्थमा और श्वास का रुकना खत्म हो जाता है। मुंह में लगातार लौंग रखकर चूसना चाहिए। इससे दमा का रोग दूर हो जाता है। लौंग तथा कालीमिर्च का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर त्रिफला तथा बबूल के रस के काढ़े में घोलकर दो चम्मच प्रतिदिन सेवन करने से श्वास रोग नष्ट हो जाता है। लौंग, त्रिगुणा, नागरमोथा काकड़ासिंगी, बहेड़ा और रीगणी को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर रख लें, इसे ग्वारपाठे के रस में मिलाकर चने के बराबर आकार की गोली बना लें। इसकी एक गोली सुबह और एक गोली शाम को लेने से दमा में लाभ मिलता है। लौंग मुंह में रखने से कफ आराम से निकलता है तथा कफ की दुर्गंध दूर हो जाती है। मुंह और श्वास की दुर्गंध भी इससे मिट जाती है। 28. फेफड़ों की सूजन: लौंग का चूर्ण बनाकर 1 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद व घी को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी और श्वांस सम्बंधी पीड़ा दूर हो जाती है। 29. अंजनहारी, गुहेरी: लौंग को पानी के साथ घिसकर गुहेरी पर लगाने से गुहेरी समाप्त हो जाती है। बस शुरूआत में थोड़ी जलन महसूस होती है।

30. दांत मजबूत करना: दांतों में कमजोरी के कारण दांत हिलने तथा टूटने लगते हैं। इस तरह की परेशानी में कालीमिर्च 50 ग्राम और लौंग 10 ग्राम को पीसकर मंजन बनाकर रोजाना मंजन करें। इससे दांत मजबूत होते हैं। 31. पायरिया: लौंग के तेल में खस और इलायची को मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम दांतों पर मलने से पायरिया ठीक होकर मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है। 5 से 6 बूंद लौंग का तेल 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर गरारे व कुल्ले करने से पायरिया रोग नष्ट होता है। 32. दांत के कीड़े: कीड़े लगे दांतों के खोखल में लौंग के तेल को रूई में भिगोकर रखें। इससे दांत के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द कम होता है। 33. काली खांसी: तवे को आग पर रखकर लौंग को भून लें, फिर उस लौंग को पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से काली खांसी ठीक हो जाती है। थोड़ी सी लौंग तवे पर भूनकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। इस लौंग के चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से काली खांसी दूर हो जाती है। बच्चों की काली खांसी में 30 से 60 मिलीग्राम गोलोचन को सुबह-शाम शहद के साथ चटाने से लाभ मिलता है। सावधानी यह रहे कि गोलोचन शुद्ध होना चाहिए क्योंकि मार्केट में यह बहुत अधिक मात्रा में नकली पाये जाते हैं। 34. खांसी: 2 लौंग गर्म मसाने वाली को तवे पर भूनकर (गर्म तवे पर लौंग 1 मिनट में ही फूलकर मोटी हो जाएगी तभी उतार लेते हैं।) तथा पीसकर 1 चम्मच दूध में मिलाकर गुनगुना सा ही बच्चों को सोते समय पिला देने से खांसी से छुटकारा मिल जाता है। 10 ग्राम लौंग, 10 ग्राम जायफल, 10 ग्राम पीपल, 20 ग्राम मिर्च, 160 ग्राम सोंठ और 210 ग्राम बूरे का चूर्ण बनाकर गोली बना लें। इन गोलियों के सेवन से खांसी, बुखार, अरुचि, प्रमेह, गुल्म, श्वास, मंदाग्नि तथा ग्रहणी के रोग में तुरन्त लाभ मिलता है। लौंग, कालीमिर्च, बहेड़े की छाल और कत्था को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। इसके बाद उसे बबूल की छाल के काढ़े में डालकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इन गोलियों को मुंह में रखकर चूसने से खांसी, श्वास, बुखार तथा नजला-जुकाम का रोग भी दूर हो जाता है। 1 भाग लौंग और 2 भाग अनार के छिलके को मिलाकर पीसकर इनका चौथाई चम्मच आधे चम्मच शहद में मिलाकर रोजाना 3 बार चाटने से खांसी के रोग में लाभ मिलता है। 10-10 ग्राम लौंग, इलायची, खस, चंदन, तज, सोंठ, पीपल की जड़, जायफल, तगर, कंकोल, स्याह जीरा, शुद्ध गुग्गुल, पीपल, वंशलोचन, जटामांसी, कमलगट्टा, नागकेशर, नेत्रवाला सभी को लेकर चूर्ण बना लें। इसके बाद इसमें उड़ाया हुआ कपूर 6 ग्राम की मात्रा में मिला दें। इस मिश्रण को शहद से अथवा मिश्री से दोनों समय सेवन करने से हिचकी अरुचि, खांसी तथा अतिसार का रोग मिट जाता है। खांसी में हल्का भुना हुआ लौंग चूसने से लाभ मिलता है। 10-10 ग्राम लौंग, पीपल, जायफल, कालीमिर्च, सोंठ तथा धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर शीशी में भर लें। इसमें से दो चुटकी चूर्ण सुबह, दोपहर और शाम को शहद के साथ सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है। 35. अफारा (पेट का फूलना): 3 ग्राम लौंग को 200 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। फिर छानकर इस पानी को पीने से आध्यमान (अफारा, गैस) समाप्त होता है। 120 मिलीग्राम से 240 मिलीग्राम तक लौंग की फांट या चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से अफारा में लाभ होता है। मिश्री में 1 से 3 बूंद लौंग के तेल या गोंद को मिलाकर सेवन करने से अफारा मिटता है। 36. जीभ और त्वचा की सुन्नता: पान खाने से या किसी अन्य कारण से जीभ फट गई हो तो एक लौंग मुंह में रखें। इससे रोग में आराम रहता है। 37. कब्ज: लौंग 10 ग्राम, कालीमिर्च 10 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम, लाहौरी नमक 50 ग्राम और मिश्री 50 ग्राम को पीसकर छानकर नींबू के रस में डाल दें। सूखने पर 5-5 ग्राम गर्म पानी से खाना खाने के बाद खुराक के रूप में लाभ होता है। 38. वमन (उल्टी): 4 लौंग को पीसकर 1 कप पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब उबलता हुआ पानी आधा रह जाये तो उसे छानकर स्वाद के मुताबिक उसमें चीनी मिलाकर पी लें और सो जायें। पूरे दिन में इस तरह चार बार इस पानी को पीने से उल्टियां आना बंद हो जाती हैं। अगर उल्टियां बंद नहीं हो रही हो तो 2 लौंग और थोड़ी सी दालचीनी लेकर 1 कप पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी आधा बाकी रह जाये तो पानी को छानकर रोगी को जब भी उल्टी आये पिलाते रहें। इससे थोड़े समय में ही उल्टियां आना बंद हो जायेंगी। यदि गर्भावस्था में उल्टी आती हो तो 2 लौंग को पीसकर शहद के साथ गर्भवती स्त्री को चटाने से उल्टी आना बंद हो जाती है। 2 लौंग को आग पर गर्म करके जब भी उल्टी हो चूसें। इससे उल्टी बंद हो जाती है। 2 लौंग को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को ठंडा होने पर इसमें मिश्री डालकर रोगी को पिलाकर सुला दें। इससे कुछ समय में ही उल्टी का रोग समाप्त हो जाता है। अगर जी मिचलाता (उबकाई) हो तो लौंग को मुंह में रखकर चूसते रहने से लाभ होता है। लौंग और दालचीनी का काढ़ा बनाकर पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है। लगभग 25 ग्राम खील, 5 दाने लौंग, 5 छोटी इलायची और 25 ग्राम मिश्री को आधे लीटर पानी में डालकर उबालने के लिए आग पर रख दें। जब 10-12 बार पानी में उबाल आ जाये तो पानी को आग पर से उतारकर छान लें इस पानी को थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है। शहद में लौंग और अजमोद का चूर्ण मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है। 39. गर्भनिरोध: नियमित रूप से सुबह के समय 1 लौंग का सेवन करने वाली को स्त्री के गर्भधारण करने की संभावना समाप्त हो जाती है।

40. मुंह के छाले: लौंग अथवा लौंग और इलायची को मिलाकर चबाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। 41. मुंह का बिगड़ा स्वाद: मुंह का स्वाद खराब होने पर लौंग को मुंह में रखकर चबाते रहने से स्वाद ठीक हो जाता है। 42. दस्त: 7 लौंग, हींग, चना और सेंधानमक को पीसकर रख लें। इसे 2 ग्राम लेकर गर्मी के दिनों में ठंडे पानी से और सर्दी के दिनों में गर्म पानी के साथ पीने से लाभ होता है। 43. मुंह की दुर्गन्ध: लौंग को हल्का भूनकर चबाते रहने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है। 44. नपुंसकता: लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी 240 मिलीग्राम इनको कूट-पीस लें, फिर इसमें शहद मिलाकर 240 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। इसकी 1 गोली पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाये तो खटाई खाने से स्खलन हो जायेगा। 45. हिचकी का रोग: 2 लौंग मुंह में रखकर उसे कुचलते हुए चूसने से हिचकी में लाभ होता है। 46. कमरदर्द: लौंग के तेल की मालिश करने से कमर दर्द के अलावा अन्य अंगों का दर्द भी मिट जाता है। इसके तेल की मालिश नहाने से पहले करनी चाहिए। 47. अग्निमान्द्यता: लौंग और हरड़ को एक कप पानी में उबाल लें, जब पानी आधा कप रह जाए, तो उसमें एक चुटकी सेंधानमक मिलाकर पीने से अपच, अग्निमान्द्य, पेट का भारीपन, खट्टी डकारें समाप्त होती हैं। 2 लौंग और 1 लाल इलायची को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीयें। 4 लौंग और 2 हरड़ को मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से अग्निमान्द्यता दूर हो जाती है। 48. कफ: 3 ग्राम लौंग 100 मिलीलीटर पानी में उबालें, जब यह एक चौथाई रह जाये तो इसे उतारकर ठंडा करें और पी लें। इससे कफ का रोग दूर हो जाता है। लौंग के तेल की तीन चार बूंद बूरा या बताशे में गेरकर सुबह-शाम लेने से लाभ मिलता है। 49. प्यास अधिक लगना: प्यास की तीव्रता होने पर दो गिलास उबले पानी में 3 लौंग डालकर पानी को ठंडा करके पिलायें। इससे प्यास कम हो जाती है। बुखार या हैजा में प्यास अधिक लगने पर दो लौंग को 250 मिलीलीटर पानी में 10 मिनट तक उबालें। इस उबले पानी को 60 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लें या तेज प्यास में 10-15 मिनट पर घूंट-घूंट करके पानी पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

50. पाचन क्रिया का खराब होना: लौंग 10 ग्राम, सौंठ 10 ग्राम, कालीमिर्च 10 ग्राम, पीपल 10 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम को मिलाकर अच्छी तरह पीसकर इसमें एक ग्राम सेंधानमक मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को एक स्टील के बर्तन में रखकर ऊपर से नींबू का रस डाल दें। जब यह सख्त हो तब इसे छाया में सुखाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद सुबह और शाम पानी के साथ लें। 51. शीतपित्त: चार लौंग पीसकर पानी में घोलकर पिलाने से तेज बुखार और पित्त के कारण उत्पन्न बुखार दूर होता है। 52. नाक के रोग: लौंग को गर्म पानी के साथ पीसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द और जुकाम ठीक हो जाता है। 53. आधासीसी (माइग्रेन) अधकपारी: लगभग 5 ग्राम लौंग को पानी के साथ पीसकर उसको हल्का सा गर्म करके कनपटियों पर लेप करने से आधे सिर का दर्द मिट जाता है। 10 ग्राम लौंग और लगभग 10 ग्राम तम्बाकू के पत्तों को पानी के साथ पीसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी का रोग दूर हो जाता है। 54. पेट में दर्द: लौंग का चूर्ण 120 मिलीग्राम से 240 मिलीग्राम सुबह और शाम सेवन करने से पेट की पीड़ा में लाभ होता है। 1 लौंग को दिन में 2 बार (सुबह-शाम) खाना खाने के बाद चूसने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) की बीमारी और उससे होने वाली बीमारियों में लाभ होता है। लौंग के उपयोग से आमाशय शक्तिशाली होता है तथा यह, भूख न लगना, पेट के कीड़े, बलगम, श्वास (सांस) की बीमारी और वात आदि के रोगों में लाभकारी है। लौंग का तेल 1 से 3 बूंद मिश्री में डालकर या गोंद में मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द में आराम मिलता है। 10 लौंग, 2 चुटकी कालानमक, आधी चुटकी हींग को पीसकर सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है। 55. गठिया रोग: लौंग, भुना सुहागा, एलुवा एवं कालीमिर्च 5-5 ग्राम को कूट-पीस लें और घीग्वार के रस में मिलाकर चने के आकार के बराबर की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। उसके बाद एक-एक गोली सुबह-शाम लेने से गठिया का रोग नष्ट हो जाता है। 56. योनि रोग: लौंग को पीसकर घोड़ी के दूध में मिलाकर सुखा लें। इसके बाद इसे पीसकर योनि में रखने से योनि का आकार संकुचित होकर योनि छोटी हो जाती है। 57. चक्कर आना: सबसे पहले दो लौंग लें और इन लौंगों को दो कप पानी में डालकर उबालें फिर इस पानी को ठंडा करके चक्कर आने वाले रोगी को पिलाने से चक्कर आना बंद हो जाता है। 58. हृदय की दुर्बलता: लौंग को पीसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनायें। इसके पीने से हृदय की जलन मिट जाती है। चार लौग को पानी में पीसकर शक्कर मिलाकर सेवन करें। इससे हृदय की दुर्बलता दूर हो जाती है। सर्दी में हृदय रोग होने पर 21 लौंग, तुलसी के 7 पत्ते, 5 कालीमिर्च तथा 4 बादाम। इन सबको पानी में पीसकर शर्बत बना लें। फिर इसमें थोड़ा शहद डालकर पी जाएं। यह शर्बत हृदय को शक्ति प्रदान करेगा। 59. पसलियों का दर्द: लौंग को मुंह में रखकर चूसने से खांसी कम होती है तथा कफ आराम से निकल जाती है। खांसी, दमा श्वास रोगों में लौंग के सेवन से लाभ पहुंचता है।

60. खसरा: खसरा निकलने पर दो लौंग पानी में घिसकर बच्चे को चटाना चाहिए। खसरा निकलने पर 2 लौंग को घिसकर शहद के साथ प्रयोग कराने से खसरा रोग ठीक होता है। खसरे के रोग में बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगती है। बार-बार पानी पीने से उसे वमन (उल्टी) होने लगती है। ऐसी हालत में पानी को उबालते समय उसमें दो-तीन लौंग डाल दें। फिर उस पानी को छानकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी बच्चे को पिलाने से प्यास समाप्त हो जाती है। जब खसरे के दाने पूरी तरह बाहर आ जायें तो लौंग को घिसकर शहद के साथ रोजाना 2-3 बार देने पर खसरा ठीक हो जाता है। 61. डब्बा रोग: 7 लौंग को पानी में घिसकर बच्चे को देने से सर्दी के मौसम में होने वाला डब्बा रोग (पसली चलना) मिट जाता है। 62. बालाचार, बालाग्रह: 20 लौंग को एक कपडे़ में बांधकर बच्चे के गले में ताबीज की तरह बांधने से दौरा आना कुछ ही समय में बंद हो जायेगा। 63. प्रलाप बड़बड़ाना: 1-1 ग्राम लौंग, तगर, ब्राह्मी और अजवायन को लगभग 16 ग्राम पानी में उबालें। जब चौथाई पानी शेष बचे तो इसे छानकर रोजाना दो या तीन बार पिलाने से प्रलाप दूर हो जाता है। 64. साइटिका (गृध्रसी): लौंग के तेल से पैरों पर मालिश करने से साइटिका का दर्द खत्म हो जाता है। 65. कुष्ठ (कोढ़): 1.20 ग्राम अंकोल की जड़ की छाल, जायफल, जावित्री और लौंग को पीसकर पानी के साथ खाने से कोढ़ का फैलना रुक जाता है। 66. लिंग दोष: लिंग की इन्द्रियों के दोष दूर करने के लिए 20 ग्राम लौंग को 50 मिलीलीटर तिल के तेल में डालकर जलाएं। ठंडा होने पर इससे लिंग की मालिश करें। इससे लिंग की इन्द्रियों के दोष दूर हो जाते हैं। 67. नाभि रोग (नाभि का पकना): लौंग का तेल व तिल का तेल दोनों को एक साथ मिलाकर नाभि पर लगाने से बच्चे को नाभि के कारण हो रहे दर्द में आराम मिलता है। 68. लिंग वृद्धि: लौंग के तेल को शहर के ओलिव ऑयल में मिला लें। इससे सुपारी को (लिंग का अगला हिस्सा) को छोड़कर लिंग की मालिश करने से लिंग के आकार में वृद्धि हो जाती है। 69. नाड़ी का दर्द: लौंग के तेल से मालिश करने से नाड़ी, कमर, जांघ और घुटने आदि सभी दर्दों में लाभ होता है।

70. गले की सूजन: एक चम्मच गेहूं के आटे का चोकर (छानबूर), एक चम्मच सेंधानमक और दो नग लौंग को पानी में चाय की तरह उबालकर तथा छानकर पिएं। इससे गले की सूजन ठीक हो जाती है। 71. टांसिल का बढ़ना: एक पान का पत्ता, 2 लौंग, आधा चम्मच मुलेठी, 4 दाने पिपरमेन्ट को एक गिलास पानी में मिलाकर काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। 72. गलकोष की सूजन व दर्द: लगभग 120 मिलीलीटर से 300 मिलीलीटर लौंग की फांट या चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से गले की सूजन और दर्द में आराम आता है। 73. कंठपेशियों का पक्षाघात: ज्योतिष्मती के बीज और 2-4 फूल लौंग डालकर काढ़ा तैयार करके 20 से 40 ग्राम रोगी को पिलाने से बहुत आराम मिलता है।


रविवार, 26 अप्रैल 2020

Premature Ejaculation or शीघ्रपतन (Mens problem with unique solutions)

शीघ्रपतन

जानकारी :

बिना सन्तुष्टी के संभोग करते हुए अगर वीर्य स्खलन हो जाये तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है।

कारण :

अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी और हर समय सहवास की कल्पना मे खोये रहना यह शीघ्रपतन का कारण बनती है।

ज्यादा गर्म मिर्च मसालों व अम्ल रसों से खाद्य-पदार्थो का सेवन करने, शराब पीने, चाय-कांफी का ज्यादा पीना और अश्लील फिल्म देखने वाले, अश्लील पुस्तकें पढ़ने वाले शीघ्रपतन से पीडित रहते हैं।

लक्षण :

वीर्य का पतलापन, सहवास के समय स्तंभन (सहवास) शक्ति का अभाव अथवा शीघ्रपतन हो जाना वीर्य का जल्दी निकल जाना।

भोजन तथा परहेज :

दिन में खाने के साथ दूध लें, मौसमी फल, बादाम, प्याज और लहसुन का प्रयोग करें।

दवा के साथ गुड़, मिर्च, तेल, खटाई, मैथुन, और कब्ज पैदा करने वाली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिएं पत्नी के साथ सहवास के साथ करते समय यह ध्यान रखें कि वाद-विवाद की उलझनों से दूर रहें।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. छोटी माई : छोटी माई का चूर्ण 2 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।

2. बरगद :

बरगद के दूध की 20 से 30 बूंदे बतासे या चीनी पर डालकर रोज सवेरे खाने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर होती है।

3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोपलें, 3 ग्राम गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री सिल पर पीसकर लुगदी बना लें, इसे खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीयें, इसे 40 दिन तक खाने से लाभ मिलता है।

बरगद के कच्चे फलों को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। 10 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से स्वप्नदोष और शीघ्रपतन मिट जाता है।

सूर्योदय से पहले बरगद के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें। एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें। हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक प्रयोग जारी रखें। इसके नियमित सेवन से शीध्रपतन (वीर्य का जल्दी निकल जाना), बलवीर्य वृद्धि के लिए, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह (वीर्य दोष) और खूनी बवासीर आदि सभी रोग ठीक हो जाता है।

3. गिलोय : गिलोय का चूर्ण और वंशलोचन को बराबर मिला-पीसकर 2 ग्राम के रूप में खाने से शीघ्रपतन नहीं होता है।

4. कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन का चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें, ऊपर से गाय के दूध में शहद मिलाकर पी लें इससे शीघ्रपतन नहीं होता है।

5. पीपल : पीपल के पेड़ का फल, जड़, छाल और कोंपल को पीसकर दूध में अच्छी तरह उबाल कर गर्म-गर्म शहद और चीनी मिला कर सुबह-शाम खाने से लाभ होता है।

6. सिरस : सिरस के फूलों का रस 10 मिलीलीटर या 20 मिलीलीटर सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ लेने से वीर्य स्तंभन होता है।

7. बबूल : बबूल की फली का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम चीनी मिलाकर खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

8. पिण्ड खजूर : पिण्ड खजूर के 5 फल रोज खायें और ऊपर से मिश्री मिला दूध कम से कम 250 मिलीलीटर रोज पियें तो इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

9. कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच चूर्ण रात में सोते समय पानी में भिगो दें। सवेरे मिश्री या शक्कर को मिलाकर शर्बत की तरह रोज घोंटकर खाने से वीर्य की मात्रा, गढ़ापान और स्तम्भन शक्ति की वृद्धि होती है।

10. असगन्ध नागौरी : असगन्ध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच और 3 कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर रोज रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन और वीर्य सम्बन्धी सारे रोग दूर होते हैं।

11. उड़द :

अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर को डालकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में रोज खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।

उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम रोज मिश्री मिले दूध को उबालकर रोज रात में सेवन करने से वीर्य और नपुंसकता (नामर्दी) से सम्बन्धी रोग दूर हो जाते हैं।

12. शकरकन्द : सूखी शकरकन्द को कूट छानकर चूर्ण तैयार करें, फिर उसे घी और चीनी की चाशनी में डालकर हलवा तैयार करके इस हलवे को खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।

13. कौंच :

कौंच के बीजों की गिरी का चूर्ण और खसखस के बीजों का चूर्ण 4 या 6 ग्राम लेकर चूर्ण को फांट या घोल के रूप में सेवन करने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

कौंच के बीज का चूर्ण, तालमखाना और मिसरी, तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीस कर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम चूर्ण खाकर, ऊपर से दूध पीना शीघ्रपतन में लाभदायक होता है।

कौंच की जड़ लगभग 1 अंगुल लम्बी मुंह में दबाकर सहवास करने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

14. वंशलोचन : वंशलोचन, सतगिलोय 10-10 ग्राम पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन में आराम मिलता है।

15. बहुफली : बहुफली 50 ग्राम पीसकर 5 ग्राम सुबह पानी से प्रयोग करें।

16. काले तिल : काले तिल 50 ग्राम अजवायन 25 ग्राम पीसकर इसमें 75 ग्राम खांड को मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

17. ब्रह्मदण्डी :

ब्रह्मदण्डी, बहुफली 50-50 ग्राम कूट छानकर इसमें 100 ग्राम खांड को मिलाकर 10 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह पानी के साथ सेवन करें।

ब्रह्मदण्डी, बहुफली, बीजबन्द, पलंग तोड 50-50 ग्राम कूट छान कर इस में 100 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-10 ग्राम को दिन में सुबह-शाम दूध या पानी के साथ सेवन करने से शीघ्रपतन के रोगी को लाभ होगा।

18. बिदारीकन्द : बिदारीकन्द, गोखरूदेसी 50-50 ग्राम कूटछानकर 5-5 ग्राम खांड़ को मिलाकर दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करें।

19. लाजवन्ती : लाजवन्ती के बीज 75 ग्राम पीस कर इसमें 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम को सुबह-शाम खांड मिले कम गर्म दूध के साथ लें।

20. मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल 60 ग्राम कूटी छनी में खांड 60 ग्राम मिलाकर 6-6 ग्राम पानी या दूध से सुबह-शाम लें।

21. कुस्ता कलई : कुस्ता कलई एक ग्राम का चौथा भाग, माजुन सालब 6 ग्राम के साथ सोते समय शीघ्रपतन के रोगी लें।

22. केला : सुबह-शाम 2 केले खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीने से धातु (वीर्य) पुष्ट होता है।

23. ईसबगोल :

ईसबगोल की 5 ग्राम भूसी में मिसरी 3 ग्राम मिलाकर खसखस के शर्बत के साथ 3 सप्ताह तक सेवन करने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।

ईसबगोल, खसखस, बेल का गूदा तथा मिश्री, सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर और सबको मिलाकर एक खुराक के रूप में दूध से लें। 15 दिन तक यह दवा लेने से वीर्य ठहरने लगता है।

ईसबगोल, शर्बत, खसखस और मिश्री को बराबर 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी में मिलाकर सेवन करने से शीघ्रपतन होने का रोग दूर हो जाता है।

24. अनार : अनार के छिलकों को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें, फिर 3 ग्राम मात्रा में चूर्ण को पानी के साथ सेवन करने से 2-3 हफ्ते में शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।

25. बड़े गोक्षुर : बड़े गोक्षुर को कूट पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण में घी और शक्कर मिलाकर चाटकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति दूर होती है।

26. छुहारा :

छुहारों को दूध में उबालकर पीने से शीघ्रपतन दूर होता है।

शीघ्रपतन और पतले वीर्य वालों को 2 छुहारे प्रतिदिन खाने से लाभ मिलता है।

27. गोखरू :

गोखरू, वंशलोचन, छोटी इलायची और सत्व गिलोय सभी चीजों 30-30 ग्राम मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। रोज 7-8 ग्राम चूर्ण मक्खन के साथ मिलाकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।

गोखरू, सूखे आंवले तथा गिलोय के बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छान लें इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 2 महीने तक शुद्ध देशी घी तथा मिश्री के साथ इस्तमाल करें।

28. प्याज : प्याज के 10 मिलीलीटर रस में शहद 7-8 ग्राम मिलाकर रोज सुबह चाटने से शीघ्रपतन दूर होता है।

29. अफीम : अफीम 1 ग्राम, 2 ग्राम जायफल, 10 ग्राम मिश्री, 2 ग्राम लौंग को पीसकर 13 गोलियां बना लें। सहवास के दो घण्टे पूर्व 1 गोली खाने से स्तम्भन होता है।

30. करेला : करेले के पत्ते और करेले को आग में हल्का सा भूनकर पीस लें और 3-3 ग्राम की गोलियां बना लें। एक गोली दूध के साथ खाकर ऊपर से थोड़ा-सा शहद चाटने से शीघ्रपतन में लाभ मिलता है।

31. करंज : करंज की जड़ को दांतों के नीचे दबाने से वीर्य ठहरता है।

32. लौंग : लौंग, दालचीनी, सोंठ, अकरकरा और सकमूनिया बराबर मात्रा में लेकर अदरख के रस में गोलियां बनाकर रख लें। फिर शहद में घिसकर एक गोली शिश्नि (लिंग) पर लगाकर सहवास करने से शीघ्रपतन नहीं होता है।

33. दालचीनी : लगभग 200 ग्राम दालचीनी और काले तिल 200 ग्राम मात्रा में लेकर पीस लें फिर शहद मिलाकर 7-7 ग्राम की गोलियां बना लें। सोते समय 1 गोली पानी के साथ खाने से शीघ्रपतन नहीं होता है।

34. ऊंटकटारा : ऊंटकटारा की जड़ शक्कर के साथ खाने से वीर्य पुष्ट होता है।

35. कसौंदी : कसौंदी की जड़ की सूखी छाल 7 ग्राम पीसकर शहद के साथ गोली बनाकर रख लें। 1 गोली 1 कप दूध के साथ सोते समय खाने से वीर्य स्तम्भन होता है।

36. तुलसी :

एक ग्राम तुलसी के बीज, 20 ग्राम अकरकरा और 30 ग्राम शक्कर पीसकर चूर्ण बना लें। रात को एक ग्राम चूर्ण दूध के साथ खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।

तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच भर पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य की पुष्टि होती है।

37. समुद्रफेन : समुद्रफेन को दूध चावल के साथ खाने से वीर्य स्तम्भन होता है।

38. गोरखमुण्डी: गाय के मट्ठे के साथ गोरखमुण्डी 14 दिन तक खाने से सेक्सुअल पावर बढ़ती है।

39. लज्जालू : लज्जालू के बीज, आइखरा के बीज और खुरासानी अजवायन बराबर लेकर उसमें गुड़ मिलाकर गोली बना लें। 1 गोली सुबह दही के साथ खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।

40. भांगरा : वीर्य स्तम्भन करने के लिये भांगरा के रस के साथ नागदोन खायें।

41. पान : पान के साथ पुनर्नवा खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

42. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ को गाय के दूध में डालकर उबालें। ठण्ड़ा होने पर दूध का दही जमा दें। दही को मथकर मक्खन निकाल लें। यह मक्खन पान में लगाकर खाने से वीर्य स्तम्भन होता है।

43. अकरकरा : 3 ग्राम अकरकरा, काली तुलसी के बीज 24 ग्राम, मिश्री 27 ग्राम को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण रख लें। यह चूर्ण खाने से वीर्य स्खलित नहीं होता है।

44. इमली :

इमली के 10 ग्राम बीज लेकर 4-5 दिन तक पानी में भिगो दें। फिर उन्हें छीलकर 4 साल पुराना गुड़ दुगुने वजन के बराबर मिलाकर चने के आकार की गोलियां बनाकर रखें। इन्हें खाने से स्तम्भन-शक्ति बढ़ती है।

आधा किलो इमली के बीज 4 दिनों तक पानी में भिगोयें रखें। उसके बाद इमली का छिलका उतारकर छाया में सुखा लें। सूख जाने पर उसको पीसकर बराबर मात्रा में पिसी हुई मिश्री में मिलाकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण को चौथाई चम्मच की मात्रा में दूध से प्रतिदिन सुबह-शाम दिन में 2 बार सेवन करने से 50 दिन में शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है तथा वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

नोट : 15 दिन तक संभोग क्रिया से दूर रहें।



45. विदारीकन्द : विदारीकन्द का चूर्ण बनाकर रख लें। 20 ग्राम गूलर के रस में मिलाकर चाटें और ऊपर से दूध में घी मिलाकर पीने से शीघ्रपतन में लाभ होता है।

46. राल : एक ग्राम बारीक पिसी राल को रात में सोते समय दूध के साथ खाने से शीघ्रपतन दूर होता है।

47. मुलेठी : मुलेठी 100 ग्राम की मात्रा में लेकर, कूट-पीसकर कपड़े से छान कर शीशे के बर्तन में रख लें। इसमें से रोज 3 खुराक दिन में 2 ग्राम शहद के साथ शीघ्रपतन की बीमारी में सेवन करें।

48. ढाक : ढाक के कोमल पत्तों का चूर्ण बनाकर गुड़ के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर दिन में 3 बार 1-1 गोली सेवन करने स्तम्भन होता है।

49. धतूरा : लौंग, अकरकरा और शुद्ध धतूरे के बीज को बराबर मात्रा में पीसकर रखें। फिर 1 ग्राम की मात्रा में लेकर एक कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करते रहने से कुछ ही दिनों में स्तम्भन बढ़कर शीघ्रपतन दूर हो जाता है।

50. शहद : स्त्री-संग सम्भोग से 1 घण्टा पहले पुरुष की नाभि में शहद भिगोया हुआ रूई का फोहा रखने से पुरुश का जल्दी स्खलन नहीं होता अर्थात पुरुश का लिंग शिथिल नहीं होता है।

51. अपामार्ग : अपामार्ग की जड़ को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। इसका चूर्ण बनाकर 2 चम्मच की मात्रा में लेकर एक चम्मच ‘शहद मिला लें। इसे एक कप ठण्डे दूध के साथ नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करने से वीर्य बढ़ता है।

महत्वपुर्ण जानकारी जो आपकी सेक्स लाइफ को बदल कर रख देगी

1) यूं तो सेब सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, लेकिन अगर इसे लौंग और नींबू के साथ इस्तेमाल किया जाए तो इसका फायदा दोगुना हो जाता है।

2) इसके सेवन के लिए एक सेब में 20 से 30 लौंग ऊपर से लगा लें और फिर निम्बू के दो टुकड़े करके इसमें भी इसी तरह निम्बू के बीचों बीच 20 से 30 लौंग लगा लें। लौंग लगाने के बाद आप इसे एक सप्ताह के लिए किसी अच्छे कटोरे या बर्तन में ढक कर रख दें।

3) ऐसा करने से सेब, लौंग और नींबू का रस अच्छे से आपस में मिल जाएंगे। अब रोजाना सेब में लगे उन 2 लौंग को गाय या बकरी के दूध के साथ पीसकर सेवन करें। ऐसा लगातार 30 दिनों तक करने से शरीर की सभी कमजोरी दूर हो जाएगी।

4) ये उपाय पुरुषों के लिए सबसे ज्यादा कारगर है। ये उनके हार्मोन्स को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद करता है। साथ ही ये उनके मूड को भी अच्छा रखने में मदद करता है।

5) अगर पुरुष अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास दूध के साथ एक चम्मच मूसली पाउडर खाना चाहिए। ऐसा नियमित तौर पर करने से उनके मसल्स मजबूत होंगे, साथ ही बीमारियों से भी बचाव होगा।


Saffron health benefits

  परिचय : केसर की खेती भारत के कश्मीर की घाटी में अधिक की जाती है। यहां की केसर हल्की, पतली, लाल रंग वाली, कमल की तरह सुन्दर गंधयुक्त होती ह...